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Faridabad: सात दिनों में बोहनी तक नहीं कर पाए मिर्जापुर के कालीन भैया, फिका रहा मेले में रंग
Sat, 11 Feb 2023 03:17 PM IST
नवीन दलाल
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
Published by: नवीन दलाल
Updated Sat, 11 Feb 2023 03:17 PM IST
सार
फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले शुरू होने के सात दिन बाद तक मिर्जापुर से आए मुनद्दर अली एक भी कालीन नहीं बेच पाए हैं। उनका कहना है कि पहली बार सूरजकुंड मेले में स्टॉल लगाने आए हैं। जिस जगह पर दुकान दी गई है, वहां लोगों की आवाजाही बेहद कम है।
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कालीन दिखाते मुनद्दर अली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओटीटी प्लेटफार्म पर बेहद चर्चा में रही वेब सीरीज मिर्जापुर के कालीन भैया अपने नाम को लेकर बेशक दबंग रहे हो, लेकिन सूरजकुंड मेले में मिर्जापुर की कालीन को खास महत्व नहीं मिल रहा है। मेले शुरू होने के सात दिन बाद तक मिर्जापुर से आए मुनद्दर अली एक भी कालीन नहीं बेच पाए हैं। उनका कहना है कि पहली बार सूरजकुंड मेले में स्टॉल लगाने आए हैं। उन्हें जिस जगह पर दुकान दी गई है, वहां लोगों की आवाजाही बेहद कम है। कई बार वह अपनी जगह बदलने के लिए अर्जी दे चुके हैं लेकिन फायदा नहीं हो रहा है।
कुरुक्षेत्र के गीता महोत्सव, हिमाचल के कुल्लू में भी लगाएं है स्टाल
मिर्जापुर से आए मुनद्दर अली के साथ मोस्जाम अली, शाहबाज आलम व नसीम अहमद भी आए हैं। उनके पास पचास रुपये से लेकर 60 हजार तक कीमत की कालीन हैं। जिसमें सिल्क, ऊन और कपास का इस्तेमाल किया जाता है। साइज की बात करें तो 2 फीट बाई चार फीट से लेकर नौ बाई 12 फीट तक उपलब्ध है। कुरुक्षेत्र के गीता महोत्सव, हिमाचल व कुल्लू के दशहरे में भी वह स्टॉल लगाते हैं। हर जगह उनका माल पूरा बिक जाता है लेकिन सूरजकुंड में वे एक भी कालीन नहीं बेच पाए हैं। उन्हें जोन चार में दुकान दी गई है यदि इसकी जगह बदल दी जाए तो सामान बिक सकता है। वह एक गाड़ी सामान भरकर लाए हैं।
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कुरुक्षेत्र के गीता महोत्सव, हिमाचल के कुल्लू में भी लगाएं है स्टाल
मिर्जापुर से आए मुनद्दर अली के साथ मोस्जाम अली, शाहबाज आलम व नसीम अहमद भी आए हैं। उनके पास पचास रुपये से लेकर 60 हजार तक कीमत की कालीन हैं। जिसमें सिल्क, ऊन और कपास का इस्तेमाल किया जाता है। साइज की बात करें तो 2 फीट बाई चार फीट से लेकर नौ बाई 12 फीट तक उपलब्ध है। कुरुक्षेत्र के गीता महोत्सव, हिमाचल व कुल्लू के दशहरे में भी वह स्टॉल लगाते हैं। हर जगह उनका माल पूरा बिक जाता है लेकिन सूरजकुंड में वे एक भी कालीन नहीं बेच पाए हैं। उन्हें जोन चार में दुकान दी गई है यदि इसकी जगह बदल दी जाए तो सामान बिक सकता है। वह एक गाड़ी सामान भरकर लाए हैं।
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