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Faridabad News: डिलिवरी में लापरवाही से मां और नवजात की मौत, अस्पताल बंद कर संचालक फरार
Thu, 02 May 2024 11:36 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
Updated Thu, 02 May 2024 11:36 PM IST
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- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से बीके के बजाय निजी अस्पताल ले गई थी आशा कार्यकत्री, मामला दर्ज
- सफदरजंग अस्पताल ले जाते समय रास्ते में निजी अस्पताल का डॉक्टर एंबुलेंस से हुआ फरार
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गांव अरुआ स्थित निजी अस्पताल के डॉक्टरों व आशा कार्यकत्री की लापरवाही के कारण डिलीवरी के दौरान मां व नवजात की मौत होने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि आशा कार्यकत्री गर्भवती महिला को डिलीवरी के लिए बीके अस्पताल की बजाए निजी अस्पताल लेकर चली गई। हालत बिगड़ने पर अस्पताल संचालक ने गर्भवती को एंबुलेंस से दिल्ली सफदरजंग भेज दिया। रास्ते में एंबुलेंस में बैठा डॉक्टर फरार हो गया। सफदरजंग अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने महिला और नवजात को मृत घोषित कर दिया। थाना छायंसा पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर निजी अस्पताल के डॉक्टरों और आशा कार्यकत्री के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है।
गांव अरुआ निवासी नितिन ने बताया कि उनकी शादी 27 फरवरी 2023 को गांव चांदहट निवासी रेशमा के साथ हुई थी। उनकी पत्नी रेशमा गर्भवती थी। 28 अप्रैल को उसको सुबह 4 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई तो उन्होंने गांव की आशा कार्यकत्री जगवती को फोन करके बुलाया। वह उसे गांव कोराली स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर गई। जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने की वजह से मौखिक तौर पर बीके अस्पताल रेफर कर दिया। पति का आरोप है कि जगवती रेशमा को बीके अस्पताल ले जाने के बजाए अपनी मर्जी से गांव चांदपुर स्थित सहारा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल ले गई। सुबह सात बजे महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। भर्ती करवाने के बाद अस्पताल में उनकी ओर से 30 हजार रुपये भी जमा करवाए गए। इसकी उसको कोई रसीद नहीं दी गई और न ही किसी रजिस्टर में एंट्री की गई। कुछ देर के बाद रेशमा को लेबर रूम में ले गए। सुबह से लेकर शाम तक रेशमा से परिजनों को मिलने नहीं दिया गया। बार-बार पूछने पर डॉक्टर ने उनको किसी प्रकार का कोई जवाब नहीं दिया। अचानक से शाम 6 बजे उनको सूचना मिली कि अस्पताल की एंबुलेंस में गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल में लेकर जा रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में मौजूद डॉक्टर से उन्होंने पूछना चाहा तो उन्हें धमका दिया गया। कुछ दूरी पर जाने के बाद एंबुलेंस में मौजूद डॉक्टर रास्ते में ही उतर गया। उस दौरान बच्चे का सिर बाहर आ चुका था। उसके बाद उनको दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ले गए। उनसे एंबुलेंस में तेल डलवाने को कहा गया। जब वह सफदरजंग अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने रेशमा और नवजात को मृत घोषित कर दिया।
वर्जनरेशमा का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के बोर्ड ने किया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। गांव में कोई अप्रिय घटना न हो उसके लिए अस्पताल को बंद कर दिया गया। बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
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- रणबीर, प्रभारी थाना छायसा
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कोराली स्वास्थ्य केंद्र से रेशमा को बीके अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। आशा कार्यकत्री यदि मरीज को निजी अस्पताल लेकर गई है तो वह नियमों के खिलाफ है। इसपर जांच की बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विजय मलिक, वरिष्ठ स्वास्थ्य चिकित्सक
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- सफदरजंग अस्पताल ले जाते समय रास्ते में निजी अस्पताल का डॉक्टर एंबुलेंस से हुआ फरार
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गांव अरुआ स्थित निजी अस्पताल के डॉक्टरों व आशा कार्यकत्री की लापरवाही के कारण डिलीवरी के दौरान मां व नवजात की मौत होने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि आशा कार्यकत्री गर्भवती महिला को डिलीवरी के लिए बीके अस्पताल की बजाए निजी अस्पताल लेकर चली गई। हालत बिगड़ने पर अस्पताल संचालक ने गर्भवती को एंबुलेंस से दिल्ली सफदरजंग भेज दिया। रास्ते में एंबुलेंस में बैठा डॉक्टर फरार हो गया। सफदरजंग अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने महिला और नवजात को मृत घोषित कर दिया। थाना छायंसा पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर निजी अस्पताल के डॉक्टरों और आशा कार्यकत्री के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है।
गांव अरुआ निवासी नितिन ने बताया कि उनकी शादी 27 फरवरी 2023 को गांव चांदहट निवासी रेशमा के साथ हुई थी। उनकी पत्नी रेशमा गर्भवती थी। 28 अप्रैल को उसको सुबह 4 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई तो उन्होंने गांव की आशा कार्यकत्री जगवती को फोन करके बुलाया। वह उसे गांव कोराली स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर गई। जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने की वजह से मौखिक तौर पर बीके अस्पताल रेफर कर दिया। पति का आरोप है कि जगवती रेशमा को बीके अस्पताल ले जाने के बजाए अपनी मर्जी से गांव चांदपुर स्थित सहारा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल ले गई। सुबह सात बजे महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। भर्ती करवाने के बाद अस्पताल में उनकी ओर से 30 हजार रुपये भी जमा करवाए गए। इसकी उसको कोई रसीद नहीं दी गई और न ही किसी रजिस्टर में एंट्री की गई। कुछ देर के बाद रेशमा को लेबर रूम में ले गए। सुबह से लेकर शाम तक रेशमा से परिजनों को मिलने नहीं दिया गया। बार-बार पूछने पर डॉक्टर ने उनको किसी प्रकार का कोई जवाब नहीं दिया। अचानक से शाम 6 बजे उनको सूचना मिली कि अस्पताल की एंबुलेंस में गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल में लेकर जा रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में मौजूद डॉक्टर से उन्होंने पूछना चाहा तो उन्हें धमका दिया गया। कुछ दूरी पर जाने के बाद एंबुलेंस में मौजूद डॉक्टर रास्ते में ही उतर गया। उस दौरान बच्चे का सिर बाहर आ चुका था। उसके बाद उनको दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ले गए। उनसे एंबुलेंस में तेल डलवाने को कहा गया। जब वह सफदरजंग अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने रेशमा और नवजात को मृत घोषित कर दिया।
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वर्जनरेशमा का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के बोर्ड ने किया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। गांव में कोई अप्रिय घटना न हो उसके लिए अस्पताल को बंद कर दिया गया। बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
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- रणबीर, प्रभारी थाना छायसा
कोराली स्वास्थ्य केंद्र से रेशमा को बीके अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। आशा कार्यकत्री यदि मरीज को निजी अस्पताल लेकर गई है तो वह नियमों के खिलाफ है। इसपर जांच की बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विजय मलिक, वरिष्ठ स्वास्थ्य चिकित्सक