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Faridabad News: हार्टसेंटर शुरू नहीं हो पा रहा, गंभीर मरीज वापस लौट रहे
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फतेहपुर तगा से छाती में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे जमील को नहीं मिला उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित हार्ट सेंटर को बंद हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है। इसको नए सिरे से शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की कवायद नजर नहीं आ रही है। इसका खामियाजा हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार को फतेहपुर तगा से छाती में तेज दर्द की शिकायत लेकर एंबुलेंस से पहुंचे मरीज को इलाज नहीं मिल सका। इलाज न मिलने पर परिवार रोता- बिलखता नजर आया।
फतेहपुर तगा से छाती में तेज दर्द की शिकायत लेकर एंबुलेंस से पहुंचे जमील को अस्पताल में हार्ट सेंटर बंद होने की जानकारी मिली। बिल्डिंग पर लगा हार्ट सेंटर का बोर्ड देखकर परिजन उन्हें यहां लेकर आए थे। सेंटर बंद मिलने पर परिवार परेशान हो गया और मरीज को कहां ले जाए, इसे लेकर असमंजस में रहा।
परिजनों के अनुसार, जमील की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और वह छाती में दर्द से परेशान थे। उनकी पत्नी बदहवास होकर मदद के लिए गुहार लगाती रही। परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीज को जल्द दूसरे अस्पताल पहुंचाने की थी। परिजनों ने बताया कि दूसरी जगह ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक अतिरिक्त पैसे मांग रहा था। ऐसे में परिवार की परेशानी और बढ़ गई। अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों के तीमारदारों का कहना था कि जब हार्ट सेंटर बंद है तो बिल्डिंग पर लगा बोर्ड भी हटाया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को गलत जानकारी के आधार पर यहां न आना पड़े।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित हार्ट सेंटर को बंद हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है। इसको नए सिरे से शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की कवायद नजर नहीं आ रही है। इसका खामियाजा हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार को फतेहपुर तगा से छाती में तेज दर्द की शिकायत लेकर एंबुलेंस से पहुंचे मरीज को इलाज नहीं मिल सका। इलाज न मिलने पर परिवार रोता- बिलखता नजर आया।
फतेहपुर तगा से छाती में तेज दर्द की शिकायत लेकर एंबुलेंस से पहुंचे जमील को अस्पताल में हार्ट सेंटर बंद होने की जानकारी मिली। बिल्डिंग पर लगा हार्ट सेंटर का बोर्ड देखकर परिजन उन्हें यहां लेकर आए थे। सेंटर बंद मिलने पर परिवार परेशान हो गया और मरीज को कहां ले जाए, इसे लेकर असमंजस में रहा।
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परिजनों के अनुसार, जमील की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और वह छाती में दर्द से परेशान थे। उनकी पत्नी बदहवास होकर मदद के लिए गुहार लगाती रही। परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीज को जल्द दूसरे अस्पताल पहुंचाने की थी। परिजनों ने बताया कि दूसरी जगह ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक अतिरिक्त पैसे मांग रहा था। ऐसे में परिवार की परेशानी और बढ़ गई। अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों के तीमारदारों का कहना था कि जब हार्ट सेंटर बंद है तो बिल्डिंग पर लगा बोर्ड भी हटाया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को गलत जानकारी के आधार पर यहां न आना पड़े।
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