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Faridabad News: मां बनने का सफर, जोखिम भरा हर कदम

Tue, 20 Oct 2026 11:58 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 11:58 PM IST
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Every step fraught with risk
चिंता : तीन माह में प्रसव के दौरान 11 महिलाओं की मौत, स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में
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एनीमिया और टीबी भी बनीं मौत की वजह

मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग चला रहा अभियान

संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। पिछले तीन माह में प्रसव के दौरान 11 गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में सामने आई है। इससे मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए चल रहीं सरकार की योजनाएं सवालों के घेरे में आ गईं हैं।
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, छह महिलाओं की मौत उच्च रक्तचाप के कारण हुई थी। जबकि एक महिला की मौत टीबी से हुई। इसके साथ ही अन्य महिलाओं की मौत के पीछे एनीमिया यानी खून की कमी सहित दूसरे कारण सामने आए हैं। मातृ मृत्यु के इन मामलों ने गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण और समय पर इलाज की जरूरत को फिर से रेखांकित किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
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समय रहते इसकी पहचान और उपचार नहीं होने पर दौरे पड़ने, अंगों को नुकसान पहुंचने और जान जाने तक का खतरा रहता है। वहीं, एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। टीबी जैसी बीमारी भी गर्भावस्था में अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर जांच और लक्षण दिखाई देने पर तत्काल उपचार जरूरी है।
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मातृ मृत्यु दर घटाने के लिए चल रहे अभियान

मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, एनीमिया मुक्त भारत और पोषण संबंधी योजनाओं सहित कई अभियान चलाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, जरूरी दवाएं, पोषण संबंधी सहायता और सुरक्षित प्रसव की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।


विशेष रूप से शहरी स्लम क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अहम है। आर्थिक कठिनाइयों, जागरूकता की कमी और समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने, रक्तचाप और हीमोग्लोबिन की जांच करवाने तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां लेने की जरूरत है। तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देने, सांस फूलने या अधिक रक्तस्राव होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से कई गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
धौज पीएचसी में गेट के बाहर प्रसव का मामला भी आया था सामने
इससे पहले 30 अगस्त को गांव धौज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट के बाहर गर्भवती महिला के प्रसव का मामला सामने आया था। परिजनों ने आरोप लगाया था कि प्रसव पीड़ा बढ़ने के बावजूद स्वास्थ्य केंद्र का गेट बंद था और मौके पर डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। बाद में चपरासी की मदद से गेट खुलवाकर महिला और नवजात को अंदर ले जाया गया। मामले की जांच के लिए उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई है। लेकिन कमेटी बनने के बाद भी अब तक इस ओर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
मई में एफआरयू-2 में भी उठे थे सवाल
मई 2026 में बल्लभगढ़ के सेक्टर-3 स्थित एफआरयू-2 में भी गर्भवती महिला को समय पर सहायता नहीं मिलने का आरोप लगा था। 16 मई की रात बड़ौली गांव की महिला को प्रसव पीड़ा के बाद स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। परिजनों ने आरोप लगाया था कि गेट बंद था और काफी देर तक आवाज लगाने के बावजूद कोई कर्मचारी मदद के लिए नहीं पहुंचा। मामला सामने आने के बाद दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया था।




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वर्जन



तीन माह में 11 गर्भवती महिलाओं की मौत हुई है। मृत्यु दर कम करने के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही महिलाओं को भी जागरूक किया जा रहा है। - डॉ. रचना, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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