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Faridabad News: 72 साल बाद भी रेफरल तक सीमित है बीके अस्पताल, आईसीयू की सुविधा नहीं

Tue, 24 Oct 2023 10:46 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 24 Oct 2023 10:46 PM IST
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Even after 72 years, BK Hospital is limited to referrals, no ICU facility
अमर उजाला ब्यूरो
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फरीदाबाद। जिले के एक मात्र 72 साल पुराने जिला अस्पताल बीके में आईसीयू की सुविधा नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को दिल्ली एम्स और सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बीके अस्पताल से प्रत्येक दिन 15 से 20 गंभीर मरीजों को दिल्ली स्थित एम्स, सफदरजंग व अन्य सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाता है। जरूरतमंद लोगों के जन के पास निजी अस्पताल का बिल अदा करने की क्षमता नहीं होती। यहां पर आईसीयू उपचार नहीं मिलने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दिल्ली रेफर करने के दौरान कई मरीजों की जिंदगी भी जा चुकी है। हालांकि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर पहले दावा किया गया था कि सरकार बनने पर अस्पतालों में सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा।
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दिल्ली की तर्ज पर मरीजों को आईसीयू, एमआरआई, सिटी स्क्रैन, किडनी ट्रांसप्लांट, आई ट्रांसप्लांट, वेंटीलेटर आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार के नौ साल पूरे होने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ है। जिले की 27 लाख की आबादी आज भी दिल्ली के भरोसे हैं और निजी अस्पतालों पर निर्भर है। इस दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत सड़क दुर्घटना व अन्य बीमारियों से जूझ रहे आईसीयू के मरीजों को होती है। ऐसे में आईसीयू और वेंटीलेटर के मरीजों को बीके अस्पताल से सीधा सफदरजंग या एम्स रेफर कर दिया जाता है।
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पांच वर्ष में तीन बार भेजा गया सरकार को प्रस्ताव

बीके अस्पताल प्रबंधन की ओर से पांच वर्ष में तीन बार आठ बेड का आईसीयू बनाने का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन, इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हालांकि कोरोना काल प्रशासन ने आनन-फानन में अस्पताल में अस्थाई आईसीयू शुरू किया था। तीन वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध कराई थी। इसके लिए निजी अस्पतालों से स्टाफ लाकर लगाया था। कोरोना खत्म होने के बाद इन्हें बंद कर दिया गया, जो अब कबाड़ हो गए हैं।
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निजी अस्पताल में एक दिन का खर्च 2500 से तीन हजार
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में करीब 10 बड़े निजी अस्पताल हैं। जिनमें आईसीयू, वेंटिलेंटर सहित सभी प्रकार की उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं हैं। सरकारी अस्पताल में अभी आईसीयू नहीं हैं। प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू वार्ड का एक दिन का खर्च करीब 2500 से 3000 रुपये तक आता है। कई बार मरीजों को एक सप्ताह से 15 दिन तक रखना पड़ता है। ऐसे में आम आदमी के लिए इतनी मोटी रकम खर्च करना आसान नहीं होता।
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अब्दुल खान गफ्फार के नाम पर बनाया गया था अस्पताल


देश के विभाजन के समय पाकिस्तान से यहां बड़ी संख्या में शरणार्थी आए थे। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 5 जून 1951 को शरणार्थियों के लिए एक अस्पताल बनवाया। अब्दुल गफ्फार खान के नाम पर इस अस्पताल का नाम बादशाह खान (बीके) रखा गया था। 72 साल बाद भी जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल बीके में आईसीयू वार्ड की सुविधा अभी तक नहीं है।

आईसीयू यूनिट में क्या है दरकार
आईसीयू यानी (इंटेंसिव केयर यूनिट) किसी भी अस्पताल की एक ऐसी इकाई है, जहां गंभीर रोगों से ग्रसित, ऑपरेशन व ट्रॉमा के मरीजों का इलाज किया जाता है। इस वार्ड में बीमारी के हिसाब से न्यूरो, सर्जिकल व मेडिकल आईसीयू अलग-अलग होते हैं। ऐसे में इनकी मशीनें और डॉक्टर भी भिन्न-भिन्न होते हैं।

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वर्जन
अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर आईसीयू शुरू करने की योजना तैयार की गई है। सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। अधिकारिक मंजूरी के बाद योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. विनय गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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