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Faridabad News: सुखदेव के जन्म और अमर कथा का किया वर्णन

Mon, 28 Aug 2023 09:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 28 Aug 2023 09:45 PM IST
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Description of Sukhdev's birth and Amar Katha
संवाद न्यूज एजेंसी
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बल्लभगढ़। सेक्टर 70 स्थित आगमन सोसाइटी में श्रीमद्भागवत कथा का कलश यात्रा निकालकर शुभारंभ किया गया। इसमें सोसाइटी की सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। आगमन सोसाइटी के प्रधान अंकित त्यागी ने बताया कि यह कथा 2 सितंबर तक चलेगी। हर दिन शाम को 3 बजे से कथा का शुभारंभ किया जाएगा।


कथा व्यास बालकृष्ण ठाकुर ने सुखदेव की अमर कथा का किस्सा सुनाते हुए कहा कि नारद के कहने पर पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि उनके गले में जो मुंडमाला है वह किसकी है, तो भोलेनाथ ने बताया वह मुंडमाला किसी और की नहीं बल्कि स्वयं पार्वती की है। हर जन्म में पार्वती विभिन्न रूपों में शिव की पत्नी के रूप में जब भी देह त्याग करती शंकर जी उनके मुंड को अपने गले में धारण कर लेते। पार्वती ने हंसते हुए कहा हर जन्म में क्या मैं ही मरती रही, आप क्यों नहीं। शंकर ने कहा मैंने अमर कथा सुन रखी है। पार्वती ने कहा मुझे भी वह अमर कथा सुनाए। जब शिव पार्वती को कथा सुना रहे थे तो वहां पर एक तोते का अंडा था, जो कथा के प्रभाव से फूट गया। उसमें से सुखदेव प्रकट हुए। कथा सुनते सुनते पार्वती सो गई। वह पूरी कथा सुखदेव ने सुनी और वह अमर हो गए। शंकर सुखदेव के पीछे उन्हें मृत्युदंड देने के लिए दौड़े। सुखदेव भागते भागते व्यास के आश्रम में पहुंचे और उनकी पत्नी के मुंह से गर्भ में प्रविष्ट हो गए। 12 वर्ष बाद सुखदेव गर्भ से बाहर आए। इस तरह सुखदेव का जन्म हुआ। उसके बाद कथा व्यास ने बताया कि भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं, किंतु भगवान के नियम ना तो गलत हो सकते हैं और ना ही बदले जा सकते हैं। भागवत के चार अक्षर से तात्पर्य यह है (भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग) जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है।
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