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सीवर ओवरफ्लो की समस्या से मिलेगी निजात
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फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। शहर के सभी 40 वार्डों में नगर निगम द्वारा माइक्रो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की योजना है। इससे एक ओर जहां सेक्टर और कॉलोनियों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या से लोगों को निजात मिलेगी। वहीं, नालों का पानी एसटीपी से ट्रीट पार्कों और ग्रीन बेल्ट में इस्तेमाल किया जाएगा। योजना पर निगम ने काम शुरू कर दिया है। इसका प्रस्ताव तैयार कर सरकार के पास भेजा जाएगा। सरकार की मंजूरी के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।
शहर के सेक्टर और कॉलोनियों में लंबे समस्या से सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। सीवर का पानी सड़कों पर बहता रहता है। सबसे अधिक एनआईटी क्षेत्र में लोग सीवर की समस्या से जूझ रहे हैं। इसे लेकर आए दिन लोग नगर निगम में धरना प्रदर्शन करते हैं। हालत यह है कि सीवर की समस्या के समाधान के लिए लोगों को मुख्यमंत्री से गुहार लगानी पड़ती है। पर्वतीय कॉलोनी में तो अक्सर सीवर लाइनें जाम रहती हैं। 10 फरवरी को कॉलोनी निवासी कामिनी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर क्षेत्र की सीवर लाइनों की समस्या से अवगत कराया था।
हर साल सीवर लाइनों की मरम्मत पर 20 लाख खर्च
नगर निगम क्षेत्र में 40 वार्ड हैं। निगम के वार्ड नंबर सात और नौ में सीवर लाइनों की मरम्मत कार्य का ठेका देने की तैयारी चल रही है। इससे पहले अन्य 38 वार्डों में सीवर लाइनों की मरम्मत का ठेका दिया गया है। निगम के अनुसार हर वार्ड में कहीं छह महीने का 25 तो कहीं 30 लाख रुपये का ठेका दिया गया है। निगम मरम्मत कार्यों पर हर साल करीब 20 करोड़ रुपये खर्च करता है।
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लाइनें करीब 15 से 20 साल पुरानी
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि निगम द्वारा सेक्टर व कॉलोनियों में डाली गई लाइनें करीब 15 से 20 साल पुरानी हो चुकी है। उस समय एक घर में दो से चार लोग रहते थे। घर मल्टीस्टोरी बनने लगे हैं। एक-एक घर में में पांच-पांच परिवार रह रहे हैं। इसका बोझ सीवर पर पड़ा है। सीवर लाइन छोटी होने के कारण ओवरफ्लो हो जाती है। इसके अलावा घरों के किचन से निकलने वाले कचरे को भी लोग सीवर में डाल देते हैं। सबसे ज्यादा सीवर जाम की समस्या पॉलीथिन की वजह से होती है। इसकी रोकथाम के लिए चालान प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सीवर लाइनों को बदलना आसान नहीं
आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम के पास फंड का काफी अभाव है। ऐसे में यदि सभी वार्डों में पुरानी सीवर लाइन की जगह नई लाइन डाली जाएंगी जो काफी फंड की जरूरत पड़ेगी। सीवर के साथ सड़के भी दोबारा बनाने पड़ेगी। इसलिए पुरानी सीवर लाइनों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत हैं।
क्षेत्र में सीवर लाइनें अक्सर जाम रहती है। इस कारण सड़कें भी जर्जर हो रही हैं। नगर निगम अधिकारी सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए जनता की आवाज विधानसभा तक पहुंचाई है। काम में गति लाने की जरूरत है।
-नीरज शर्मा, एनआईटी विधायक
सभी 40 वार्डों में सीवर लाइनों के बेहतर प्रबंधन पर काम किया जा रहा है। निगम द्वारा एक सर्वे भी कराया गया। प्रत्येक वार्ड में एक एसटीपी लगाने की योजना है। इससे सीवर का पानी ट्रीट कर सेक्टर व कॉलोनियों के पार्कों व ग्रीन बेल्ट को दिया जाएगा। पेयजल की बर्बादी भी रुकेगी और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से भी निजात मिलेगी।
- यशपाल यादव, नगर निगम आयुक्त
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शहर के सेक्टर और कॉलोनियों में लंबे समस्या से सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। सीवर का पानी सड़कों पर बहता रहता है। सबसे अधिक एनआईटी क्षेत्र में लोग सीवर की समस्या से जूझ रहे हैं। इसे लेकर आए दिन लोग नगर निगम में धरना प्रदर्शन करते हैं। हालत यह है कि सीवर की समस्या के समाधान के लिए लोगों को मुख्यमंत्री से गुहार लगानी पड़ती है। पर्वतीय कॉलोनी में तो अक्सर सीवर लाइनें जाम रहती हैं। 10 फरवरी को कॉलोनी निवासी कामिनी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर क्षेत्र की सीवर लाइनों की समस्या से अवगत कराया था।
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हर साल सीवर लाइनों की मरम्मत पर 20 लाख खर्च
नगर निगम क्षेत्र में 40 वार्ड हैं। निगम के वार्ड नंबर सात और नौ में सीवर लाइनों की मरम्मत कार्य का ठेका देने की तैयारी चल रही है। इससे पहले अन्य 38 वार्डों में सीवर लाइनों की मरम्मत का ठेका दिया गया है। निगम के अनुसार हर वार्ड में कहीं छह महीने का 25 तो कहीं 30 लाख रुपये का ठेका दिया गया है। निगम मरम्मत कार्यों पर हर साल करीब 20 करोड़ रुपये खर्च करता है।
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लाइनें करीब 15 से 20 साल पुरानी
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि निगम द्वारा सेक्टर व कॉलोनियों में डाली गई लाइनें करीब 15 से 20 साल पुरानी हो चुकी है। उस समय एक घर में दो से चार लोग रहते थे। घर मल्टीस्टोरी बनने लगे हैं। एक-एक घर में में पांच-पांच परिवार रह रहे हैं। इसका बोझ सीवर पर पड़ा है। सीवर लाइन छोटी होने के कारण ओवरफ्लो हो जाती है। इसके अलावा घरों के किचन से निकलने वाले कचरे को भी लोग सीवर में डाल देते हैं। सबसे ज्यादा सीवर जाम की समस्या पॉलीथिन की वजह से होती है। इसकी रोकथाम के लिए चालान प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सीवर लाइनों को बदलना आसान नहीं
आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम के पास फंड का काफी अभाव है। ऐसे में यदि सभी वार्डों में पुरानी सीवर लाइन की जगह नई लाइन डाली जाएंगी जो काफी फंड की जरूरत पड़ेगी। सीवर के साथ सड़के भी दोबारा बनाने पड़ेगी। इसलिए पुरानी सीवर लाइनों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत हैं।
क्षेत्र में सीवर लाइनें अक्सर जाम रहती है। इस कारण सड़कें भी जर्जर हो रही हैं। नगर निगम अधिकारी सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए जनता की आवाज विधानसभा तक पहुंचाई है। काम में गति लाने की जरूरत है।
-नीरज शर्मा, एनआईटी विधायक
सभी 40 वार्डों में सीवर लाइनों के बेहतर प्रबंधन पर काम किया जा रहा है। निगम द्वारा एक सर्वे भी कराया गया। प्रत्येक वार्ड में एक एसटीपी लगाने की योजना है। इससे सीवर का पानी ट्रीट कर सेक्टर व कॉलोनियों के पार्कों व ग्रीन बेल्ट को दिया जाएगा। पेयजल की बर्बादी भी रुकेगी और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से भी निजात मिलेगी।
- यशपाल यादव, नगर निगम आयुक्त