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Faridabad News: ऑटो चालक की बेटी ने कड़ी मेहनत से पाई सफलता
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95.6 फीसदी अंक लाकर माता पिता का नाम रोशन किया
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद कई छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते इन छात्राओं को ट्यूशन समेत कई अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाई। लेकिन इसके बगैर ही इन्होंने अपने स्तर पर अध्यापकों की सहायता से कड़ी मेहनत की और अच्छे अंक हासिल कर अपने माता-पिता को उम्मीद जगाई है कि वे आगे भी इसी तरह मेहनत कर उन्हें गरीबी से निजात दिलाएंगी।
पढ़ाई में गरीबी नहीं आई आड़े
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय (मेट्रो) स्कूल की छात्रा खुशी कुमारी ने आर्थिक तंगी के बावजूद 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 95.6 फीसदी अंक से परीक्षा पास कर परिवार का नाम रोशन किया है। अब वह विज्ञान विषय लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि पापा मनोहर कुमार ऑटो चालक हैं। मेरे पिता मुझे एक कामयाब डॉक्टर व इंजीनियर के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने इस कामयाबी के पीछे स्कूल के शिक्षक और माता-पित्ता की अहम भूमिका बताई है।
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डॉक्टर बनकर देश सेवा करना चाहती हैं सबनूर
एनआईटी एक नंबर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की सबनूर ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि अभी तक स्कूल में इससे अधिक किसी भी विद्यार्थी के नंबर नहीं हैं। सबनूर के पिता श्रमिक हैं। वह अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहते हैं। इसके लिए वह अभी से ही तैयारियों में जुट गई है। उन्होंने पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी।
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प्रशासनिक सेवा है पहली प्राथमिकता
एनआईटी एक नंबर राजकीय स्कूल की टीना भविष्य में प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं। उन्होंने 10वीं में 86.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल में आने के बाद रोजाना 9 घंटे पढ़ाई करती थीं। उनके पिता एक निजी कंपनी में बतौर श्रमिक काम करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद पढ़ाई में किसी प्रकार की दिक्कतें नहीं आने दी। स्कूल में शिक्षक जो पढ़ाते थे, उसे मैं घर आकर दोबारा जरूर पढ़ाई करती थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद कई छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते इन छात्राओं को ट्यूशन समेत कई अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाई। लेकिन इसके बगैर ही इन्होंने अपने स्तर पर अध्यापकों की सहायता से कड़ी मेहनत की और अच्छे अंक हासिल कर अपने माता-पिता को उम्मीद जगाई है कि वे आगे भी इसी तरह मेहनत कर उन्हें गरीबी से निजात दिलाएंगी।
पढ़ाई में गरीबी नहीं आई आड़े
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय (मेट्रो) स्कूल की छात्रा खुशी कुमारी ने आर्थिक तंगी के बावजूद 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 95.6 फीसदी अंक से परीक्षा पास कर परिवार का नाम रोशन किया है। अब वह विज्ञान विषय लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि पापा मनोहर कुमार ऑटो चालक हैं। मेरे पिता मुझे एक कामयाब डॉक्टर व इंजीनियर के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने इस कामयाबी के पीछे स्कूल के शिक्षक और माता-पित्ता की अहम भूमिका बताई है।
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डॉक्टर बनकर देश सेवा करना चाहती हैं सबनूर
एनआईटी एक नंबर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की सबनूर ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि अभी तक स्कूल में इससे अधिक किसी भी विद्यार्थी के नंबर नहीं हैं। सबनूर के पिता श्रमिक हैं। वह अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहते हैं। इसके लिए वह अभी से ही तैयारियों में जुट गई है। उन्होंने पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी।
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प्रशासनिक सेवा है पहली प्राथमिकता
एनआईटी एक नंबर राजकीय स्कूल की टीना भविष्य में प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं। उन्होंने 10वीं में 86.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल में आने के बाद रोजाना 9 घंटे पढ़ाई करती थीं। उनके पिता एक निजी कंपनी में बतौर श्रमिक काम करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद पढ़ाई में किसी प्रकार की दिक्कतें नहीं आने दी। स्कूल में शिक्षक जो पढ़ाते थे, उसे मैं घर आकर दोबारा जरूर पढ़ाई करती थी।