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Faridabad News: बल्लभगढ़ में एक्यूआई <bha>@</bha> 310
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फरीदाबाद नगर निगम मुख्यालय के पास टूटी सड़क से उड़ती धूल। संवाद
सांस, अस्थमा और आंखों में जलन की शिकायत लेकर रोजाना 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे जिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
जिले में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बल्लभगढ़ में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यहां एक्यूआई 310 दर्ज किया गया, जबकि फरीदाबाद में यह 120 रहा। बढ़ते प्रदूषण के बीच जिला नागरिक अस्पताल में सांस, अस्थमा और आंखों में जलन की शिकायत लेकर रोजाना 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
बल्लभगढ़ में प्रदूषण बढ़ने के पीछे सड़क किनारे जमा धूल और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले धुएं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सड़कों पर जमा धूल वाहनों की आवाजाही के दौरान हवा में फैलती है। वहीं, औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए धूल को उड़ने से रोकना और औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी जरूरी है। लेकिन नगर निगम के तरफ से सड़कों से धूल हटाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया जा रहा है।
बुजुर्गों और सांस के मरीजों को अधिक परेशानी
प्रदूषण का सबसे अधिक असर बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है। खराब हवा के कारण अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ी है। इसके अलावा लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 100 से अधिक मरीजों इन समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं।
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सड़कों से धूल हटाने के इंतजाम नाकाफी
बल्लभगढ़ में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सड़कों पर जमा धूल को हटाने के लिए नियमित सफाई और पानी का छिड़काव जरूरी है। औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी भी आवश्यक है। नगर निगम का दावा है कि प्रतिदिन एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। सड़कों पर न तो रोड स्वीपिंग मशीन दिखाई दे रही हैं और न ही एंटी स्मॉग गन से छिड़काव होता नजर आ रहा है। ऐसे में धूल के कण हवा में घुलकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
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डॉक्टर की सलाह
जिला नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहित अग्रवाल के अनुसार प्रदूषण बढ़ने पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। प्रदूषण बढ़ने के साथ ही होने पर मास्क का इस्तेमाल करें और परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
जिले में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बल्लभगढ़ में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यहां एक्यूआई 310 दर्ज किया गया, जबकि फरीदाबाद में यह 120 रहा। बढ़ते प्रदूषण के बीच जिला नागरिक अस्पताल में सांस, अस्थमा और आंखों में जलन की शिकायत लेकर रोजाना 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
बल्लभगढ़ में प्रदूषण बढ़ने के पीछे सड़क किनारे जमा धूल और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले धुएं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सड़कों पर जमा धूल वाहनों की आवाजाही के दौरान हवा में फैलती है। वहीं, औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए धूल को उड़ने से रोकना और औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी जरूरी है। लेकिन नगर निगम के तरफ से सड़कों से धूल हटाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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बुजुर्गों और सांस के मरीजों को अधिक परेशानी
प्रदूषण का सबसे अधिक असर बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है। खराब हवा के कारण अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ी है। इसके अलावा लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 100 से अधिक मरीजों इन समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं।
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सड़कों से धूल हटाने के इंतजाम नाकाफी
बल्लभगढ़ में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सड़कों पर जमा धूल को हटाने के लिए नियमित सफाई और पानी का छिड़काव जरूरी है। औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी भी आवश्यक है। नगर निगम का दावा है कि प्रतिदिन एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। सड़कों पर न तो रोड स्वीपिंग मशीन दिखाई दे रही हैं और न ही एंटी स्मॉग गन से छिड़काव होता नजर आ रहा है। ऐसे में धूल के कण हवा में घुलकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
डॉक्टर की सलाह
जिला नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहित अग्रवाल के अनुसार प्रदूषण बढ़ने पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। प्रदूषण बढ़ने के साथ ही होने पर मास्क का इस्तेमाल करें और परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।