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फरीदाबाद की आबोहवा और बिगड़ी
Updated Sun, 11 Nov 2018 08:20 PM IST
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फरीदाबाद की हवा के तेवर और बिगड़े
फरीदाबाद। दिवाली पर पटाखे और पराली जलाए जाने का सबसे ज्यादा असर औद्योगिक नगरी के वातावरण पर नजर आ रहा है। शहर की वायु गुणवत्ता बेहद खतरनाक होने के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। हवा नहीं चलने के कारण रविवार को लगभग पूरे दिन शहर की वायु स्वस्थ मनुष्य को भी बीमार करने के स्तर तक प्रदूषित रही। पर्यावरण प्रदूषण (नियंत्रण एवं रोकथाम) प्राधिकरण (ईपीए) के आदेश पर नगर निगम, हुडा और जिला प्रशासन की ओर से शहर की प्रमुख सड़क और स्थानों पर पानी का छिड़काव करवाया गया लेकिन इससे स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ।
दिवाली पर पटाखे और दो दिन पूर्व हरियाणा, दिल्ली में पराली जलाए जाने का असर रविवार को औद्योगिक नगरी के वायुमंडल पर नजर आया। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक का औसत 742 के चिंताजनक स्तर पर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार रात बारह बजे से दोपहर बारह बजे के दौरान पीएम 2.5 की मात्रा आठ घंटे से भी ज्यादा समय तक 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के उच्चतम स्तर पर बनी रही। सुबह छिड़काव करवाए जाने और सूरज की थोड़ी तपिश बढ़ने के कारण पीएम 2.5 की मात्रा 413 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक नीचे गिरी लेकिन यह ज्यादा समय नहीं रहा और वातावरण में इसकी मात्रा फिर बढ़ने लगी। रविवार को प्रदूषक नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा भी वातावरण में तीन गुना से अधिक 252 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचा, लगभग पूरे दिन एनओ2 की मात्रा मानक से दो गुनी के करीब ही बनी रही। ओजोन की मात्रा भी 144 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर की दर तक पहुंची, वातावरण में इसकी सामान्य मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम होनी चाहिए।
फरीदाबाद। दिवाली पर पटाखे और पराली जलाए जाने का सबसे ज्यादा असर औद्योगिक नगरी के वातावरण पर नजर आ रहा है। शहर की वायु गुणवत्ता बेहद खतरनाक होने के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। हवा नहीं चलने के कारण रविवार को लगभग पूरे दिन शहर की वायु स्वस्थ मनुष्य को भी बीमार करने के स्तर तक प्रदूषित रही। पर्यावरण प्रदूषण (नियंत्रण एवं रोकथाम) प्राधिकरण (ईपीए) के आदेश पर नगर निगम, हुडा और जिला प्रशासन की ओर से शहर की प्रमुख सड़क और स्थानों पर पानी का छिड़काव करवाया गया लेकिन इससे स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ।
दिवाली पर पटाखे और दो दिन पूर्व हरियाणा, दिल्ली में पराली जलाए जाने का असर रविवार को औद्योगिक नगरी के वायुमंडल पर नजर आया। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक का औसत 742 के चिंताजनक स्तर पर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार रात बारह बजे से दोपहर बारह बजे के दौरान पीएम 2.5 की मात्रा आठ घंटे से भी ज्यादा समय तक 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के उच्चतम स्तर पर बनी रही। सुबह छिड़काव करवाए जाने और सूरज की थोड़ी तपिश बढ़ने के कारण पीएम 2.5 की मात्रा 413 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक नीचे गिरी लेकिन यह ज्यादा समय नहीं रहा और वातावरण में इसकी मात्रा फिर बढ़ने लगी। रविवार को प्रदूषक नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा भी वातावरण में तीन गुना से अधिक 252 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचा, लगभग पूरे दिन एनओ2 की मात्रा मानक से दो गुनी के करीब ही बनी रही। ओजोन की मात्रा भी 144 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर की दर तक पहुंची, वातावरण में इसकी सामान्य मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम होनी चाहिए।
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