{"_id":"5b9fa7bf867a557ff306d331","slug":"121537189823-faridabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला स्तरीय साइकिल मेले में नहीं पहुंची कंपनियां, बिना साइकिल लौटे विद्यार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला स्तरीय साइकिल मेले में नहीं पहुंची कंपनियां, बिना साइकिल लौटे विद्यार्थी
Updated Mon, 17 Sep 2018 06:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साइकिल खरीदो, रसीद दो और भुगतान लो...
फरीदाबाद। केंद्र सरकार की निशुल्क साइकिल योजना का एक और सच सामने आया। फरीदाबाद में सोमवार को चार घंटे तक भरी दोपहर में विद्यार्थी इस योजना का लाभ लेने के लिए खडे़ रहे मगर साइकिल वितरित करने वाली कंपनियां नदारद रहीं। गुस्साए बच्चों के साथ आए अभिभावकों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर शिक्षा विभाग के अफसर वहां से खिसक गए। यह लगातार दूसरा साल था जब फरीदाबाद में साइकिल मेला फेल साबित हुआ। 4 से 18 सितंबर तक मेला चलाया जाना था जिसका शुभारंभ ही 17 सितंबर को हुआ। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस योजना के लिए अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
राजकीय स्कूलों की बोर्ड कक्षाओं में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने निशुल्क साइकिल योजना की शुरुआत की थी। जिला शिक्षा विभाग ने सोमवार को अपने सेक्टर-16 स्थित कार्यालय पर बच्चों को साइकिल वितरण करने के लिए बुलाया था। ऐसे में सुबह आठ बजे से ही कार्यालय के बाहर विद्यार्थियों की भीड़ एकत्र होना शुरू हो गई। दूसरी ओर मेले में एक भी साइकिल कंपनी के न पहुंचने से अफसरों के हाथ-पांव फूलने लगे। करीब चार घंटे धूप में साइकिल का इंतजार करने विद्यार्थियों और उनके परिजनों का सब्र का बांध टूट गया। इसके बाद शिक्षा विभाग के अफसरों से पूछताछ हुई तो वह बगलें झांकने लगे।
मौके पर पहुंची जिला शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कौर ने अभिभावकों के बीच आकर घोषणा की कि सरकार की ओर से 20 और 22 इंच साइकिल का रेट 3100 और 3300 निर्धारित किया गया है। ऐसे में विद्यार्थी खुद ही बाजार से साइकिल खरीदकर बिल शिक्षा विभाग में जमा करा दें। शासन से बजट आने के बाद उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
शिक्षा अधिकारी के इस बयान पर अभिभावक भड़क उठे और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। अभिभावक नैन सिंह, राजपाल और पोप सिंह ने कहा कि अगर उनके पास पैसे होते तो वह खुद ही साइकिल न खरीद लेते। लोगों के गुस्से को देखते हुए आननफानन में मेला समाप्त कर दिया गया। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारी वहां से धीरे-धीरे खिसक लिए।
कक्षा-9 और 11 के अनुसूचित विद्यार्थियों को दी जानी थी साइकिल
केंद्र सरकार की निशुल्क साइकिल योजना के तहत हरियाणा बोर्ड में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के ऐसे विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल दी जानी थी, जोकि कक्षा-9 और 11 में पढ़ते हैं।
पिछले साल भी फेल हो गया था मेला
साइकिल मेला पिछले साल भी इसी प्रकार हंगामे की भेंट चढ़ गया था। उस समय मेले में कुछ साइकिल कंपनियों ने शिरकत की थी, मगर एक भी अभिभावक ने साइकिल नहीं खरीदी। उनका कहना था कि साइकिल सरकार को निशुल्क देनी है। ऐसे में सरकार ही साइकिल कंपनियों का भुगतान करे। हालांकि, बाद में कुछ अभिभावकों ने साइकिल खरीद के बाद शिक्षा विभाग में बिल जमा कराया था।
मेले में डीपीआरओ के माध्यम से सार्वजनिक सूचना देकर विभिन्न साइकिल कंपनियों को आमंत्रित किया गया था, मगर एक भी कंपनी मेले में शामिल नहीं हुई। शिक्षा विभाग ने अपने स्तर पर साइकिल खरीदने की बात अभिभावकों से कही है। तय मद के अनुसार खरीदी गई साइकिल के बिल का भुगतान विद्यार्थियों के खाते में कर दिया जाएगा। साइकिल खरीदने के बाद ही राशि भुगतान करने का प्रावधान है। अभिभावक अपने स्तर पर साइकिल नहीं खरीदना चाहते। इससे विभाग को दिक्कतें आ रही हैं।
- सतेंद्र कौर, जिला शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
फरीदाबाद। केंद्र सरकार की निशुल्क साइकिल योजना का एक और सच सामने आया। फरीदाबाद में सोमवार को चार घंटे तक भरी दोपहर में विद्यार्थी इस योजना का लाभ लेने के लिए खडे़ रहे मगर साइकिल वितरित करने वाली कंपनियां नदारद रहीं। गुस्साए बच्चों के साथ आए अभिभावकों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर शिक्षा विभाग के अफसर वहां से खिसक गए। यह लगातार दूसरा साल था जब फरीदाबाद में साइकिल मेला फेल साबित हुआ। 4 से 18 सितंबर तक मेला चलाया जाना था जिसका शुभारंभ ही 17 सितंबर को हुआ। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस योजना के लिए अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
राजकीय स्कूलों की बोर्ड कक्षाओं में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने निशुल्क साइकिल योजना की शुरुआत की थी। जिला शिक्षा विभाग ने सोमवार को अपने सेक्टर-16 स्थित कार्यालय पर बच्चों को साइकिल वितरण करने के लिए बुलाया था। ऐसे में सुबह आठ बजे से ही कार्यालय के बाहर विद्यार्थियों की भीड़ एकत्र होना शुरू हो गई। दूसरी ओर मेले में एक भी साइकिल कंपनी के न पहुंचने से अफसरों के हाथ-पांव फूलने लगे। करीब चार घंटे धूप में साइकिल का इंतजार करने विद्यार्थियों और उनके परिजनों का सब्र का बांध टूट गया। इसके बाद शिक्षा विभाग के अफसरों से पूछताछ हुई तो वह बगलें झांकने लगे।
विज्ञापन
मौके पर पहुंची जिला शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कौर ने अभिभावकों के बीच आकर घोषणा की कि सरकार की ओर से 20 और 22 इंच साइकिल का रेट 3100 और 3300 निर्धारित किया गया है। ऐसे में विद्यार्थी खुद ही बाजार से साइकिल खरीदकर बिल शिक्षा विभाग में जमा करा दें। शासन से बजट आने के बाद उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
शिक्षा अधिकारी के इस बयान पर अभिभावक भड़क उठे और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। अभिभावक नैन सिंह, राजपाल और पोप सिंह ने कहा कि अगर उनके पास पैसे होते तो वह खुद ही साइकिल न खरीद लेते। लोगों के गुस्से को देखते हुए आननफानन में मेला समाप्त कर दिया गया। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारी वहां से धीरे-धीरे खिसक लिए।
कक्षा-9 और 11 के अनुसूचित विद्यार्थियों को दी जानी थी साइकिल
केंद्र सरकार की निशुल्क साइकिल योजना के तहत हरियाणा बोर्ड में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के ऐसे विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल दी जानी थी, जोकि कक्षा-9 और 11 में पढ़ते हैं।
पिछले साल भी फेल हो गया था मेला
साइकिल मेला पिछले साल भी इसी प्रकार हंगामे की भेंट चढ़ गया था। उस समय मेले में कुछ साइकिल कंपनियों ने शिरकत की थी, मगर एक भी अभिभावक ने साइकिल नहीं खरीदी। उनका कहना था कि साइकिल सरकार को निशुल्क देनी है। ऐसे में सरकार ही साइकिल कंपनियों का भुगतान करे। हालांकि, बाद में कुछ अभिभावकों ने साइकिल खरीद के बाद शिक्षा विभाग में बिल जमा कराया था।
मेले में डीपीआरओ के माध्यम से सार्वजनिक सूचना देकर विभिन्न साइकिल कंपनियों को आमंत्रित किया गया था, मगर एक भी कंपनी मेले में शामिल नहीं हुई। शिक्षा विभाग ने अपने स्तर पर साइकिल खरीदने की बात अभिभावकों से कही है। तय मद के अनुसार खरीदी गई साइकिल के बिल का भुगतान विद्यार्थियों के खाते में कर दिया जाएगा। साइकिल खरीदने के बाद ही राशि भुगतान करने का प्रावधान है। अभिभावक अपने स्तर पर साइकिल नहीं खरीदना चाहते। इससे विभाग को दिक्कतें आ रही हैं।
- सतेंद्र कौर, जिला शिक्षा अधिकारी