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बादशाहपुर एसटीपी शोधन के बाद भी निकाल रहा गंदा पानी
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शोधित होने पर भी पानी की गुणवत्ता खराब
फरीदाबाद। नगर निगम के बादशाहपुर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित होने के बावजूद पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (प्रनिबो) ने बादशाहपुर एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान) से निकलने वाले शोधित पानी की जांच कराई तो सच्चाई सामने आई। प्रनिबो ने नगर निगम को नोटिस जारी कर दूषित पानी के संबंध में जवाब मांगा है। यदि निगम प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की तो बोर्ड निगम के खिलाफ पर्यावरण न्यायालय में वाद दायर करेगा।
शहरी क्षेत्र से निकलने वाले इस्तेमालशुदा पानी को शोधित करने के लिए नगर निगम के चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। कई साल पहले निर्मित यह एसटीपी अब पुरानी मशीन और क्षमता से अधिक भार होने के कारण गंदे पानी को पूरी तरह शोधित नहीं कर पा रहे हैं। शहर की नालियों से आया गंदा पानी बादशाहपुर एसटीपी में भी शोधित किया जाता है। शोधन के बाद यह पानी यमुना नदी में छोड़ा जाता है। प्रनिबो अधिकारियों के मुताबिक, बादशाहपुर एसटीपी में पुरानी मशीन और जर्जर हो चुके आधारभूत ढांचे के कारण पानी मानक के अनुसार शोधित नहीं हो रहा है। शोधन के बाद भी पानी की गुणवत्ता खराब ही रहती है, यह पानी यमुना नदी में छोड़ा जाता है जिससे नदी के पानी की गुणवत्ता में भी गिरावट आ रही है और भूजल भी दूषित हो रहा है।
जांच में दोनों नमूने फेल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जयभगवान शर्मा ने बताया कि हाल ही में बादशाहपुर स्थित नगर निगम के दो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के नमूने लिये थे, जांच में दोनों नमूने फेल हो गए। उनके मुताबिक निगम प्रशासन एसटीपी का रखरखाव ठीक से नहीं कर रहा, वहां पर मशीनें काफी पुरानी है, जो कई बार बंद हो जाती हैं। इसलिए पानी ठीक से शोधित नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि निगम को नोटिस जारी कर एसटीपी मेें सुधार करने की मांग की है, अगर निगम की ओर से से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो बोर्ड पर्यावरण कोर्ट में केस दायर करेगा।
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फरीदाबाद। नगर निगम के बादशाहपुर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित होने के बावजूद पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (प्रनिबो) ने बादशाहपुर एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान) से निकलने वाले शोधित पानी की जांच कराई तो सच्चाई सामने आई। प्रनिबो ने नगर निगम को नोटिस जारी कर दूषित पानी के संबंध में जवाब मांगा है। यदि निगम प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की तो बोर्ड निगम के खिलाफ पर्यावरण न्यायालय में वाद दायर करेगा।
शहरी क्षेत्र से निकलने वाले इस्तेमालशुदा पानी को शोधित करने के लिए नगर निगम के चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। कई साल पहले निर्मित यह एसटीपी अब पुरानी मशीन और क्षमता से अधिक भार होने के कारण गंदे पानी को पूरी तरह शोधित नहीं कर पा रहे हैं। शहर की नालियों से आया गंदा पानी बादशाहपुर एसटीपी में भी शोधित किया जाता है। शोधन के बाद यह पानी यमुना नदी में छोड़ा जाता है। प्रनिबो अधिकारियों के मुताबिक, बादशाहपुर एसटीपी में पुरानी मशीन और जर्जर हो चुके आधारभूत ढांचे के कारण पानी मानक के अनुसार शोधित नहीं हो रहा है। शोधन के बाद भी पानी की गुणवत्ता खराब ही रहती है, यह पानी यमुना नदी में छोड़ा जाता है जिससे नदी के पानी की गुणवत्ता में भी गिरावट आ रही है और भूजल भी दूषित हो रहा है।
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जांच में दोनों नमूने फेल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जयभगवान शर्मा ने बताया कि हाल ही में बादशाहपुर स्थित नगर निगम के दो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के नमूने लिये थे, जांच में दोनों नमूने फेल हो गए। उनके मुताबिक निगम प्रशासन एसटीपी का रखरखाव ठीक से नहीं कर रहा, वहां पर मशीनें काफी पुरानी है, जो कई बार बंद हो जाती हैं। इसलिए पानी ठीक से शोधित नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि निगम को नोटिस जारी कर एसटीपी मेें सुधार करने की मांग की है, अगर निगम की ओर से से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो बोर्ड पर्यावरण कोर्ट में केस दायर करेगा।
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