आखिर इनपर लगाम लगाएगा कौन

Noida Bureau Updated Tue, 12 Sep 2017 06:03 PM IST
आखिर इन पर कौन लगाएगा लगाम
फरीदाबाद। गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या के बाद स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं लेकिन स्कूल के बाहर भी नौनिहाल सुरक्षित नहीं हैं। स्कूली वाहनों की जांच के नाम पर पुलिस महज खानापूर्ति कर रही है। प्राइवेट ऑटो और वैन संचालक रोजाना हजारों बच्चों की जान अब भी जोखिम में डाल रहे हैं। गुरुग्राम की घटना के बाद पुलिस-प्रशासन और शिक्षा विभाग बच्चों की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के दावे कर रहे हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। स्कूली वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा निर्देश के बावजूद तय मानकों को नजरअंदाज किया जा रहा है। पेश है एक रिपोर्ट :

मुनाफे के लिए सुरक्षा से खिलवाड़
नियमानुसार निजी ऑपरेटर अपने वाहन को स्कूल मानक के अनुरूप बनवाकर पंजीकृत करने के बाद ही स्कूली वाहन के रूप में प्रयोग ला सकता है, लेकिन अधिकांश स्कूल वैन संचालक इस नियम को मानने की जरूरत नहीं समझते। एनआईटी पांच स्थित निजी स्कूल के बाहर कैमरे में कैद की गई स्कूल वैन में क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चों को लादा जा रहा था, इसके अलावा इस पर कहीं भी स्कूली वाहन का चिह्न अंकित नहीं था।

तीन की क्षमता, ढोये जा रहे 12 बच्चे
थ्री सीटर ऑटो में तीन से अधिक सवारियां बैठाने पर ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की तरफ से चालान काट दिया जाता है, लेकिन एक ऑटो में 10 से 12 बच्चों को लादकर ले जा रहे ऑटो वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। बीके चौक पर कैमरे में कैद किए किया गया ऑटो बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालकर सड़क पर तेज गति से दौड़ाया जा रहा था।

आग से निपटने के नहीं इंतजाम
सीटिंग क्षमता के अनुसार प्रत्येक बस में अग्निशम यंत्र अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए। 12 सीट की बस में 2 किलोग्राम, 20 सीट तक की बस में 5 किलोग्राम और 20 से ज्यादा सीट वाली बसों में 5 किलोग्राम के 2 अग्निशमन यंत्र ड्राइवर केबिन में होने जरूरी, लेकिन प्राइवेट स्कूल बसों व अन्य वाहनों में ऐसा कोई इंतजाम दिखाई नहीं देता।

आखिर किसके भरोसे हैं आपके बच्चे
जिन स्कूली वाहनों में आप अपने बच्चों को भेज रहे हैं, उनके चालक और परिचालक के बारे में शायद ही आपको जानकारी होगी। स्कूली वाहनों में सुरक्षा की दृष्टि से यह एक बड़ी चूक है। चालकों के वेरिफिकेशन के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। अधिकांश बच्चे प्राइवेट वाहनों से सफर करते हैं, लेकिन इनके चालकों की वेरिफिकेशन का ख्याल न तो स्कूलों वालों को है और न ही अभिभावक ही सजग हैं।

स्कूली वाहनों के लिए तय मानक

. स्कूल बस का रंग गोल्डन येलो विद ब्राउन लाइनिंग होना जरूरी।
. निर्धारित क्षमता से अधिक संख्या में बच्चों को बैठाना प्रतिबंधित।
. बस चालक के लिए कम से कम पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य।
. स्कूली वाहनों में प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध होना अनिवार्य।
. स्कूली वाहनों के दरवाजों में लॉकिंग की व्यवस्था होना जरूरी।
. स्कूली बस में आगे से चढ़ाने और पीछे से उतारने का नियम।

वर्जन
तय मानकों के अनुरूप सभी स्कूली वाहनों की जांच की जा रही है। ऑटो और वैन संचालक अगर गलति करते पाए जाते हैं तो उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।
- हेमंत कुमार, एसएचओ ट्रैफिक

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