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यूं ही नहीं कहलाता फरीदाबाद आश्रयदाता नगरी, जानिए क्या हैं कारण
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 15 Jun 2017 09:30 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान के विस्थापितों को बसाने वाली बाबा फरीद की नगरी को आश्रयदाता नगरी बोलने की एक और भी वजह है। प्रदेश के 23 चिल्ड्रेन होम में सबसे ज्यादा 14 फरीदाबाद में ही हैं। कभी विस्थापितों को आश्रय देने वाली बाबा फरीद की नगरी अब जन्म के बाद छोड़े गए, अनाथ, बिछड़े हुए, मंदबुद्धि, बीमार बच्चों को आश्रय दे रही है।
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हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हलसा) न्याययिक सेवाएं देने के साथ ही समाज कल्याण के भी कार्य करता है। इनमें घर बिछड़े, अनाथ बच्चों की देखभाल भी शामिल है। हलसा प्रदेश भर के चिल्ड्रेन होम और ऑबजर्वेशन होम में रहने वाले बच्चों की देखभाल और उनके स्वस्थ शारीरिक, मानसिक विकास को लेकर गंभीर है। इसके लिए जिलो में चाइल्ड होम ऑब्जर्वेशन कमेटी गठित की हुई है।
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हलसा की ओर से जारी सूची के मुताबिक प्रदेश में कुल 23 चिल्ड्रेन होम और ऑब्जर्वेशन होम हैं। इनमें से 14 सिर्फ फरीदाबाद में ही हैं। इनके अलावा अंबाला और भिवानी में तीन-तीन गुरुग्राम में दो और फतेहबाद में एक चिल्ड्रेन होम है। प्रदेश के बाकी 18 जिलों में चिल्ड्रेन होम या ऑब्जर्वेंशन होम नहीं हैं।
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चिल्ड्रेन होम में तराशे जा रहे छह सौ से अधिक बच्चे
कमेटी सदस्य एडवोकेट रवींद्र गुप्ता ने बताया कि शहर के चौदह चिल्ड्रेन होम्स में कई विशिष्टता लिए हुए हैं। प्रभात एन अवेकनिंग में मंदबुद्धि बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने के लिए उन्हें मनौवैज्ञानिक आधार पर संरक्षण दिया जा रहा है। कन्या सदन में लड़कियों को स्किल इंडिया के तहत स्वावलंबी बनने के हुनर सिखाए जाते हैं। एसओएस विलेज में रहने वाले बच्चे शैक्षणिक और बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में समाज के उच्च वर्ग परिवारों के बच्चों से बराबर है। मिरेकल में जन्म के बाद लावारिस छोड़े गए बच्चे आत्मविश्वास के साथ बड़े हो रहे हैं।
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव समप्रीत कौर (सीजेएम) ने अमर उजाला से अपने अनुभव बांटते हुए कहा कि ट्रेन से कटने जा रहे एक बालक को बचाना वह अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं। सितंबर 2016 में डलसा की ओर से ऑपरेशन मिलाप चलाया गया था। बेसहारा, अनाथ बच्चों को बेहतर जिंदगी देने के लिए शुरू किए गए इस अभियान के तहत वह टीम के साथ ओल्ड रेलवे स्टेशन गई थीं। वहां उन्होंने एक बारह साल के बच्चे को बचाया था। चार दिन से भूखे बच्चे ने उन्हें बताया था कि वह अनाथ है और ट्रेन के नीचे कटने के लिए आया था। उन्होंने उस बच्चे को सबसे पहले भरपेट खाना खिलवाया और एक चिल्ड्रेन होम पहुंचाया। आंखों में खुशी की चमक के साथ डलसा सचिव ने बताया कि पिछले माह विजिट में वह बच्चा सबसे खुश और आत्मविश्वास से पूर्ण होकर उनसे मिला। उस बच्चे को बेहतर शिक्षा और कॅरियर दिलाने के उनके प्रयास जारी हैं।
चाइल्ड होम वेलफेयर कमेटी हर माह न सिर्फ इन चिल्ड्रेन होम की विजिट करती है बल्कि इनमें रहने वाले बच्चों के स्वस्थ शारीरिक, मानसिक विकास के लिए कार्य भी करती है। कमेटी शहर के उद्यमियों, समाज सेवकों की मदद से इन होम्स में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई लिखाई और कॅरियर बनवाने के प्रयास कर रही है।-समप्रीत कौर (सीजेएम) अध्यक्ष चाइल्ड होम वेलफेयर कमेटी, सचिव डलसा
कमेटी की ओर से सितंबर 2016 में ऑपरेशन मिलाप चलाया गया था। इस दौरान हरिद्वार से लापता हुए छह साल के बच्चे को उसके माता पिता से मिलाया गया। कमेटी चिल्ड्रेन होम में रहने वाले बच्चों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है।-एडवोकेट रविंद्र गुप्ता, चाइल्ड होम वेलफेयर कमेटी के सदस्य
फरीदाबाद के चिल्ड्रेन होम बच्चों की संख्या
एसओएस ग्रीनफील्ड 180
एसओएस सेक्टर 29 50
मिरेकल चेरिटेबल ट्रस्ट 09
करुणा चाइल्ड केयर स्प्रिंग फील्ड कॉलोनी 20
आर्य कन्या सदन सेक्टर 15 60
प्रणव करुण संघ तिगांव 35
सर्विंग पीपुल इन नीड(स्पिन)तिगांव 30
एजुकेशन कम वेकेशन एसो. फॉर डिसेबल्ड बड़ौली 30
सेंट जोसेफ सर्विस सोसायटी चिल्ड्रेन विलेज बल्लभगढ़ 30
एसोसिएशन फॉर द वेलफेयर ऑफ हैंडीकैप्ड 20
कर्म मार्ग चेरिटेबल सोसायटी खेड़ी कलां 50
आब्जर्वेशन होम एनआईटी-5 80
न्यू होप चेरिटेबल सोसायटी सेक्टर 21 12
प्रभात एन अवेकनिंग खेड़ी 16
कुल 622