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ब्लेड से दो हिस्सों में कट गई थी बच्ची की आंख, डेढ़ महीने की मेहनत के बाद लौटी रोशनी
Wed, 28 Aug 2019 06:56 PM IST
Prachi Priyam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
Published by: Prachi Priyam
Updated Wed, 28 Aug 2019 06:56 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
फरीदाबाद के एक स्कूल में प्रोजेक्ट बनाने के लिए पेपर कटर का इस्तेमाल कर रही एक सात वर्षीय बच्ची की आंख में कटर लगने के कारण आंख का नेत्रपटल दो टुकड़ों में बंट गया। हादसे में बच्ची की आंख की रोशनी चली गई, लेकिन परिजन अब फोर्टिस के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद का शुक्रिया कर रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ नेत्र पटल को जोड़ा बल्कि बच्ची की आँख की रोशनी भी वापस लौटा दी। हादसे के बाद 7 वर्षीय प्लाक्षी तायल भी एक नई जिंदगी की अनुभूति कर रही है।
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प्लाक्षी मूलरूप से मुज्जफरनगर की रहने वाली है। उसके पिता मोहित रसायनशास्त्र के अध्यापक हैं। प्लाक्षी के पिता मोहित ने बताया कि हादसा 11 जुलाई गुरुवार का है। दूसरी कक्षा की छात्रा प्लाक्षी गुरुवार को पेपर प्रोजेक्ट के लिए सहपाठियों के साथ मिलकर नटराज पेपर कटर से पेपर कटिंग कर रही थी। दुर्भाग्यवश कटर हाथ से फिसला, जिसका ब्लेड निकलकर उसकी आंख में जा लगा।
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परिजनों ने कई स्थानीय अस्पतालों में दिखाया, लेकिन सभी ने आंख की रोशनी चले जाने की बात कही। घबराए परिजनों ने फरीदाबाद फोर्टिस अस्पताल में रिपोर्ट भेज कर परामर्श मांगा। मोहित ने बताया कि डॉ. अरविंद ने उसे समझाया कि घटना के कुछ घंटे तक आंख में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। इस बीच माइक्रोस्कोप सर्जरी से बच्ची की आंख की रोशनी लौटाई जा सकती है।
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परिजनों ने निर्धारित समय में बच्ची को फरीदाबाद अस्पताल पहुंचाया। यहां करीब डेढ़ घंटे की सर्जरी के बाद आंख की सफल सर्जरी की गई। दो दिन बाद बच्ची को डिस्चार्ज किया गया। इसके बाद डेढ़ माह तक डॉक्टरों ने बच्ची को अपनी निगरानी में रखा। दो दिन पूर्व बच्ची की आंख की पट्टी हटी तो वह साफ-साफ देख पा रही थी। डॉक्टर अरविंद ने बताया कि पंद्रह दिन बाद दोबारा बच्ची की जांच की जाएगी। जांच के बाद यदि जरूरत हुई तो चश्मे लग सकते हैं।