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Delhi NCR News: एआई रिपोर्ट की जांच के लिए फेयरनेस टूल तैयार
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-एआई के फैसलों का हो सकेगा मूल्याकंन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भागीदारी के बीच उसकी निष्पक्षता सुनिश्चित करने की पहल की गई है। इस संबंध में इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) दिल्ली ने निष्पक्ष एआई फेयरनेस टूल तैयार किया है। इसकी मदद से एआई मॉडल द्वारा लिए निर्णयों का मूल्यांकन किया जा सकेगा। भारत मंडपम में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में इसका डेमो प्रस्तुत किया गया है।
आईआईआईटी दिल्ली ने दूर संचार विभाग के सहयोग से इसे तैयार किया है। आईआईआईटी दिल्ली के ईसीई विभाग और सेंटर ऑफ एआई में असिस्टेंट प्रोफेसर रंजीता प्रसाद ने बताया कि निष्पक्ष एआई टूल की मदद से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। यह टूल निष्पक्ष रिपोर्ट जारी करेगा। अभी इस टूल को बीटा वर्जन में जारी किया है। यह जोखिम की पहचान करेगा कि एआई सिस्टम का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है उसके द्वारा लिए निर्णय से क्या असर पड़ सकता है।
टूल का यह कर सकेंगे इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल ऑडिटर, रेगुलेटर्स, डेवलपर्स, ऑर्गेनाइजेशन और शोधकर्ता कर सकेंगे। भविष्य में एआई आधारित निष्पक्ष ऐप योजना तैयार करने पर काम चल रहा है। इस टूल से भविष्य में एआई के प्रमाणीकरण के अवसर खुलेंगे। यहां तक कि इस टूल का उपयोग स्वास्थ्य देशभाल, कानून और वित्तीय क्षेत्र के लिए भी किया जा सकेगा।
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बिना पूर्वाग्रह और सटीकता से होगी जांच
प्रोफेसर रंजीता ने कहा कि रोजगार के लिए मिलने वाले आवेदनों की बिना पूर्वाग्रह और सटीकता से जांच कर सकेगा। यह टूल ओपन सोर्स रूप में उपलब्ध कराया गया है। खास बात यह है कि यह सिर्फ भारतीय मानकों तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य वैश्विक एआई फेयरनेस दिशा-निर्देश के अनुसार भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस परियोजना को तैयार करने दूरसंचार विभाग (अंतरराष्ट्रीय संबंध) के उपमहानिदेशक अविनाश अग्रवाल और आईआईआईआईटी दिल्ली की इंटेलिकॉम लैब में शोधकर्ता शशांक शेखर का साथ मिला।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भागीदारी के बीच उसकी निष्पक्षता सुनिश्चित करने की पहल की गई है। इस संबंध में इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) दिल्ली ने निष्पक्ष एआई फेयरनेस टूल तैयार किया है। इसकी मदद से एआई मॉडल द्वारा लिए निर्णयों का मूल्यांकन किया जा सकेगा। भारत मंडपम में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में इसका डेमो प्रस्तुत किया गया है।
आईआईआईटी दिल्ली ने दूर संचार विभाग के सहयोग से इसे तैयार किया है। आईआईआईटी दिल्ली के ईसीई विभाग और सेंटर ऑफ एआई में असिस्टेंट प्रोफेसर रंजीता प्रसाद ने बताया कि निष्पक्ष एआई टूल की मदद से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। यह टूल निष्पक्ष रिपोर्ट जारी करेगा। अभी इस टूल को बीटा वर्जन में जारी किया है। यह जोखिम की पहचान करेगा कि एआई सिस्टम का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है उसके द्वारा लिए निर्णय से क्या असर पड़ सकता है।
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टूल का यह कर सकेंगे इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल ऑडिटर, रेगुलेटर्स, डेवलपर्स, ऑर्गेनाइजेशन और शोधकर्ता कर सकेंगे। भविष्य में एआई आधारित निष्पक्ष ऐप योजना तैयार करने पर काम चल रहा है। इस टूल से भविष्य में एआई के प्रमाणीकरण के अवसर खुलेंगे। यहां तक कि इस टूल का उपयोग स्वास्थ्य देशभाल, कानून और वित्तीय क्षेत्र के लिए भी किया जा सकेगा।
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बिना पूर्वाग्रह और सटीकता से होगी जांच
प्रोफेसर रंजीता ने कहा कि रोजगार के लिए मिलने वाले आवेदनों की बिना पूर्वाग्रह और सटीकता से जांच कर सकेगा। यह टूल ओपन सोर्स रूप में उपलब्ध कराया गया है। खास बात यह है कि यह सिर्फ भारतीय मानकों तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य वैश्विक एआई फेयरनेस दिशा-निर्देश के अनुसार भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस परियोजना को तैयार करने दूरसंचार विभाग (अंतरराष्ट्रीय संबंध) के उपमहानिदेशक अविनाश अग्रवाल और आईआईआईआईटी दिल्ली की इंटेलिकॉम लैब में शोधकर्ता शशांक शेखर का साथ मिला।