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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   facilities not available in faridabad after expending five thousand crore

ग्रेटर फरीदाबाद में 5 हजार करोड़ देने के बाद भी सुविधाएं मयस्सर नहीं

Sun, 23 Oct 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sun, 23 Oct 2016 12:07 AM IST
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नहरपार के इलाके को भले ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त टाउनशिप दर्शाने के लिए ग्रेटर फरीदाबाद नाम दे दिया गया हो, लेकिन सच्चाई ये है कि यहां 70 हजार से अधिक परिवार आधारभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं।

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खास बात ये है कि सरकार और उसके विभाग इन परिवारों से यह सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) वसूल चुके हैं।
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हालात यह है कि 2004 में लागू हुआ मास्टर प्लान दस साल की मियाद पूरी होने के बावजूद परवान नहीं चढ़ सका है। यहां के बाशिंदे खुद को सरकार, प्रशासन की लाल फीताशाही और बिल्डरों की मनमानी से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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ओमेक्स हाइट्स सेक्टर-86 के निवासी करीब छह साल से इलाके में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, ग्रेटर फरीदाबाद का मास्टर प्लान 2004 में लागू किया गया था।

मास्टर प्लान के मुताबिक, दस साल में यह टाउनशिप पूरी तरह तैयार हो जानी चाहिए थी। मियाद खत्म हुए दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन लोगों को कोई सुविधाएं नहीं मिली है।

ग्रेटर फरीदाबाद रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद मिनोचा इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हैं। उनके मुताबिक, वह बताते हैं कि सरकारी विभाग ईडीसी के नाम पर लोगों से पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा वसूल चुके हैं।

शाम होते ही अराजकतत्व सड़क के किनारे गाड़ियां खड़ी कर सरेआम शराबखोरी और नशेबाजी करते हैं, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। एसआरएस रेजिडेंसी के कैलाश शर्मा कहते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान ग्रेफ में दम तोड़ चुका है।

उन्होंने बताया कि इलाके में 76 हजार फ्लैट हैं, इनके लिए आज तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन सका है। मास्टर प्लान में मास्टर ट्रीटमेंट प्लांट (एमटीपी) का निर्माण तय था, लेकिन अभी तक उसके लिए प्रशासन जमीन नहीं तलाश सका है।

ओमेक्स डिवाइन सेक्टर-78 के अरुण आर्या और बीपीटीपी पार्क इलीट सेक्टर-85 में रहने वाले अशोक कुमार कहते हैं कि इतने बड़े इलाके में सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

ओमेक्स डिवाइन सेक्टर-78 के अभय महेश्वरी बिजली आपूर्ति व्यवस्था से परेशान हैं। वह बताते हैं कि डीएचबीवीएन की ओर से यहां तीन सबस्टेशन बनाए जाने हैं, लेकिन अभी तक कोई काम नहीं हुआ।

नहीं बन पाई पुलिस चौकी
मास्टर प्लान में हर चार सेक्टर के बीच एक पुलिस चौकी के अलावा पूरे इलाके में तीन फायर ब्रिगेड स्टेशन बनाए जाने थे। अभी तक न तो चौकी बनी और न ही फायर स्टेशन का कोई पता है। शहर की दमकल के पास तीन मंजिल से ज्यादा ऊंची इमारत की आग बुझाने के साधन नहीं हैं।

ग्रेफ में हाईराइज इमारतें औसतन 15 मंजिल वाली हैं, यदि इनमें आग लगी तो मुश्किल हो सकती है। बिल्डरों ने तीन सौ लोगों के आधार पर सीवेज प्लांट बनाए हैं, लेकिन इस्तेमाल दो हजार लोग कर रहे है।

इससे वह भी चौक और ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहे हैं। ऊपर से एनजीटी ने रेजिडेंसियों को सील करने का आदेश जारी कर दिया। यदि एसटीपी नहीं तैयार हुआ तो उन लोगों का क्या दोष, जिन्होनें लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदा।

मास्टर रोड में 22 संशोधन किए
मास्टर प्लान में मास्टर रोड सीधी रखी गई, लेकिन नेताओं और रसूखदार कब्जेदारों को खुश करने के लिए सीधी सड़क को मोड़ दिया गया। उनके मुताबिक मास्टर रोड में 22 संशोधन किए जा चुके हैं। सड़क को बेवजह मोड़ देने से हादसे के नौ से अधिक प्वाइंट बन चुके हैं। इन पर आए दिन एक्सीडेंट होते हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है।

लीपापोती करता है प्रशासन
मेरा मुख्यमंत्री से सवाल है कि क्या उन्होंने हम खरीदारों को बेवकूफ बनाने के लिए बिल्डर-बायर ग्रीवांस कमेटी बनाई थी। डीसी हर तीन माह में हम सबको बुलाते हैं और जब हम अपनी समस्याएं बिल्डरों के सामने रखते हैं तो कार्रवाई के नाम पर डीसी साहब भी लीपापोती में लग जाते हैं। पुलिस आयुक्त हनीफ कुरैशी के पास तीन शिकायतें पड़ी हैं, लेकिन आज तक बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज नहीं किया गया।-रेनू खट्टर, सचिव, ग्रेफ

आदिम युग में रह रहे हम
ग्रेटर नोएडा (यूपी) जब बनकर तैयार हुआ, तब ग्रेटर फरीदाबाद का मास्टर प्लान बनाया गया था। आज आप ग्रेनो और गुड़गांव से ग्रेफ की तुलना करिए, तो पता चलेगा कि हम तो अभी भी आदिम युग में ही रह रहे हैं। सड़क, सीवेज, बिजली कोई भी सुविधा नहीं है यहां। -एके गौड़, निवासी, ओमेक्स हाइट सेक्टर-86

मास्टर प्लान में जो ग्रीन बेल्ट रखी गई थी, बिल्डरों ने उस पर भी प्लॉटिंग कर बेच दिया। सवाल यह है कि बिल्डरों को ग्रीन बेल्ट पर प्लॉटिंग करने की अनुमति किसने और कैसे दी, यही नहीं ग्रीन बेल्ट का सीएलयू किस तरह कर दिया गया। -मुकेश मिश्रा, निवासी, बीपीटीपी एलीट फ्लोर


सड़कें जोखिम भरी हैं। स्पीड ब्रेकर सही जगह पर बनाए नहीं गए, यहां तक कि दो नहरों के बीच बनाए गए पुल भी एक दूसरे के ठीक सामने नहीं हैं, जिससे हादसे होते हैं। हुडा, नगर निगम किसी ने भी सड़कों पर चेतावनी या साइन बोर्ड नहीं लगाए हैं, जिससे हादसे होते हैं। -हरिंदर कनीन, निवासी, बीपीटीवी गे्रडूरा

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