सावधान! फेसबुक पर टैगिंग बन सकती है मुसीबत
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चुनावी मौसम में सोशल मीडिया पर कंटेंट को टैग करने की चाहत आपके लिए आफत बन सकती है। चुनाव आयोग ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति चुनाव संबंधी सामग्री में पांच से अधिक लोगों को टैग करता है तो इसे पेड प्रचार माना जाएगा।
फेसबुक, टि्वटर जैसी टॉप सोशल साइट्स पर चुनाव प्रचार का दायरा बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग ने भी इसे आचार संहिता के दायरे में लाने के साथ ही प्रचार करने के लिए मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया है।
शिकायत मिलने पर टैग करने वाले पर कार्रवाई के साथ ही उसके खर्च को प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष टीम बनाई गई है।
हर प्रोफाइल पर है इनकी पैनी नजर
इस पर होने वाले खर्च को प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जा रहा है। इससे बचने के लिए उम्मीदवार कार्यकर्ताओं व परिचितों के जरिए सोशल मीडिया पर अपने चुनाव प्रचार का दायरा बढ़ा रहे हैं।
आम लोगों की ओर से चुनाव सामग्री को टैग करने से प्रचार भी हो जाता है और खर्च भी प्रत्याशी के खाते में नहीं जाता है। इसको लेकर चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर कोई प्रत्याशी के समर्थन में किसी चुनाव सामग्री में पांच से अधिक लोगों को टैग करता है तो इसे पेड प्रचार माना जाएगा।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी के चीफ नोडल ऑफिसर अंकुर गर्ग ने बताया कि सोशल मीडिया की वेबसाइट्स पर नजर रखने के लिए टीम बनाई जा रही है। नामांकन के दौरान उम्मीदवारों की ओर से बताई गई सोशल साइट्स के अकाउंट के अलावा उनकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोगों के पोस्ट पर भी नजर रखी जाएगी।
...तो रद्द हो जाएंगा नामांकन!
आयोग के अनुसार सोशल साइट्स पर अगर टैगिंग का खेल ऐसे ही चला तो प्रत्याशी का नामांकन रद्द किया जा सकता है साथ ही टैग करने वाले पर जुर्माना भी हो सकता है।
आयोग के इस आदेश के बाद एक ओर जहां सोशल साइट्स के यूजर्स सतर्क हो गए हैं वहीं चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी एकदम चौकन्ने हो गए हैं। क्योंकि समर्थकों की एक भी चूक उनके लिए कभी भी मुसीबत बन सकती है।