फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Eye Cancer Gamma knife attacks eye cancer vision remains intact

Eye Cancer: गामा नाइफ से आंखों के कैंसर पर वार, रोशनी बरकरार; अब तक होती थी सामान्य सर्जरी, निकालनी पड़ती आंख

Tue, 19 Mar 2024 12:53 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 19 Mar 2024 12:53 AM IST
सार

अभी तक ट्यूमर को निकालने के लिए सर्जरी करनी पड़ती थी। इस सर्जरी में ट्यूमर के साथ आंख को भी निकालना पड़ता था, जिस कारण उक्त मरीज की स्थायी रूप से रोशनी भी चली जाती थी।

विज्ञापन
Eye Cancer Gamma knife attacks eye cancer vision remains intact
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : instagram

विस्तार

एम्स में गामा नाइफ से आंखों में होने वाले कैंसर पर वार कर रोशनी को सुरक्षित बचाया गया। पिछले ढाई साल में इस तकनीक की मदद से संस्थान के डॉक्टरों ने 15 मरीजों का इलाज किया है और सभी के परिणाम बेहतर मिले। अभी तक ट्यूमर को निकालने के लिए सर्जरी करनी पड़ती थी। इस सर्जरी में ट्यूमर के साथ आंख को भी निकालना पड़ता था, जिस कारण उक्त मरीज की स्थायी रूप से रोशनी भी चली जाती थी। नई तकनीकी से इस समस्या से स्थाई रूप से छुटकारा मिल रहा है।

विज्ञापन


विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों की रोशनी को बचाने के लिए एम्स के नेत्र विज्ञान विभाग ने न्यूरोलॉजी विभाग के साथ मिलकर आंखों के कैंसर (यूवेल मेलेनोमा) के इलाज के लिए गामा नाइफ रेडियो सर्जरी की शुरुआत की। इसमें 30 मिनट में ट्यूमर पर 0.1 मिली मीटर की सटीकता के साथ गामा किरणें दी गई। जो एक बार में ही ट्यूमर का इलाज कर देती है। मरीज को इलाज देकर उसी दिन छुट्टी भी कर दी जाती है। जिस कारण मरीजों की इलाज की गति बढ़ेगी और इंतजार कम होगा।
विज्ञापन


एम्स के डॉ. आर पी सेंटर की प्रोफेसर डॉ. भावना चावला ने कहा कि एम्स ने पिछले ढाई साल में 15 मरीजों का इस तकनीक से इलाज किया। इसमें सबसे छोटा मरीज 14 साल का था। सभी मरीजों पर परिणाम बेहतर मिले हैं। इस आधुनिक तकनीक की मदद से रोशनी को बचाया जा सकता है। यह मरीज के लिए काफी राहत की बात है। अभी तक सामान्य सर्जरी में रौशनी चली जाती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन्हें होने का खतरा
- गोरा चेहरा
- भूरी आंखें
- आंखों में तिल
- पराबैंगनी किरणों का प्रभाव

20 साल पहले आ रही भारत में समस्या
पश्चिमी देशों की तुलना में यह कैंसर 20 साल पहले हो रहा है। हालांकि इसका कारण पता नहीं है। इसे जानने के लिए शोध चल रहा है। पश्चिमी देशों में यह कैंसर 60 की उम्र में मिलता है, जबकि भारत में यह कैंसर 40 की उम्र में ही मिलने लगा है। वहीं एम्स में सबसे छोटा मरीज 14 साल का मिला। इसके पीछे हार्मोन को कारण माना जा रहा हैं।

अंतिम स्टेज पर भी कारगर
न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर दीपक ने कहा कि यह तकनीक चौथे स्टेज के कैंसर पर भी कारगर है। अभी तक सामान्य तकनीक में पूरे माह रेडियोथेरेपी देनी पड़ती थी। जबकि नई तकनीक में एक बार में ही इलाज कर दिया जाता है। इस तकनीक से इलाज करने पर ट्यूमर दिमाग के दूसरे हिस्से में नहीं फैलता और मरीज की हालत जल्द खराब नहीं होती। दर्द कम होता है और मरीज अंतिम समय तक होश में रहता है।

यह है यूवेल मेलेनोमा
यूवेल मेलेनोमा एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है, जो आंख के ऊतकों में होता है। यह मामले प्रति दस लाख में पांच लोगों में पाए जाते हैं। यह बीमारी आंखों में बाहरी, मध्य और भीतरी परत में हो सकती है। इलाज में देरी से यह पूरे शरीर में तेजी से फैल सकता है। इलाज न मिलने से मरीज की मौत तक हो सकती है।

गामा नाइफ सबसे बेहतर
प्रोफेसर दीपक ने कहा कि एम्स में गामा नाइफ का इस्तेमाल 40 साल से हो रहा है। अभी तक इसकी मदद से अलग-अलग कैंसर की 10 हजार से अधिक रेडियोसर्जरी हो चुकी है। पिछले साल एक हजार सर्जरी की गई हैं। यह गले के ऊपर के सभी तरह के ट्यूमर के लिए फायदेमंद है। इसकी सटीकता 0.1 मिली मीटर की होती है। जबकि साइबर नाइफ व प्रोटोन बीम की ज्यादा है। कई तरह के कैंसर दिमाग के दूसरे हिस्से में फैल जाते हैं। इसमें मेटास्टेटिक, गलाइमा, कान का ट्यूमर, दिमाग में नसों के गुच्छे में कैंसर सहित अन्य सभी में गामा नाइफ कारगर है। इसका इस्तेमाल पहले तीन से चार मिली मीटर तक किया जाता था, अब इसका बड़े आकार के कैंसर पर भी हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed