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एक्सप्रेस-वे घोटालाः अपनों को जमीन दिलाकर खेला था भ्रष्टाचार का ‘खेल’

अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 20 Nov 2019 05:05 AM IST
मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे
मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए अपने खास और चहेते लोगों को जमीन खरीदवाकर जिले में 20 करोड़ से ज्यादा रकम के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया था। तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी और विमल कुमार शर्मा पर आर्बिट्रेशन में 10 गुना ज्यादा मुआवजा तय कर अपनों को फायदा पहुंचाने का आरोप है। 



तत्कालीन एडीएम (एलए) के बेटे शिवांग राठौर के नाम पर भी शासन की बिना अनुमति के जमीन खरीदी गई थी। पूर्व मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने मामले की जांच कराई तो दोनों पूर्व डीएम का नाम अपनी रिपोर्ट में शामिल कर उन पर न केवल कार्रवाई की संस्तुति की थी, बल्कि इस बड़े घोटाले की सीबीआई से जांच की सिफारिश भी की थी। 


भ्रष्टाचार का यह खेल गाजियाबाद में नाहल, कुशलिया, डासना और रसूलपुर सिकरोड क्षेत्र की जमीन अधिग्रहण में किया गया। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए 2011-12 में 71.14 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की गई थी। 2013 में यहां अवार्ड घोषित किया गया था। 2016 में क्षेत्र के 23 किसानों ने मंडलायुक्त से शिकायत की थी।

उनका कहना था कि उनकी जमीन एक्सप्रेस-वे में अधिग्रहीत की गई है, लेकिन उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। तत्कालीन मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने अपने स्तर पर जांच कराई। जांच में यहां बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। 19 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण अभी तक नहीं हो सका है।

तत्कालीन मंडलायुक्त ने सितंबर 2017 में जांच रिपोर्ट शासन और प्रदेश सरकार को भेजी। रिपोर्ट में दो आईएएस अधिकारी और एक पीसीएस अधिकारी के शामिल होने की बात कही गई है। आरोप है कि धारा-3 (डी) के बाद भी किसानों से जमीन खरीदकर बैनामे कराए गए, जबकि इस धारा की कार्रवाई के बाद संबंधित क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लग जाती है।

आरोपियों ने किसानों को गुमराह कर सस्ते में जमीन खरीद ली और फिर एडीएम भू-अर्जन व डीएम से सांठगांठ कर निर्धारित की गई दरों से करीब 10 गुना ज्यादा दरों पर मुआवजा ले लिया। सारे घोटाले में गाजियाबाद के तत्कालीन डीएम विमल शर्मा व निधि केसरवानी की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। आर्बिट्रेशन के 9 ऐसे मामलों को पकड़ा गया है जो विमल शर्मा व केसरवानी की कोर्ट में तय हुए और करीब 10 गुना से अधिक का मुआवजा दे दिया गया। 

मंडलायुक्त की रिपोर्ट में यह थे आरोप 
तत्कालीन एडीएम एल घनश्याम सिंह पुत्र शिवांग राठौर ने गांव नाहल कुशलिया और हापुड़ के गांव पटना मुरादनगर में सात खसरा नंबरों की जमीन 30 सितंबर 2013 को 1582.19 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से खरीदी, जबकि यहां 1235.18 रुपये के हिसाब से अवार्ड हुआ था। अधिग्रहण की अधिसूचना इससे पूर्व सात अगस्त 2012 को ही हो चुकी थी। जमीन एक करोड़ 78 लाख पांच हजार 539 रुपये में खरीदी गई और आर्बिट्रेशन के बाद इसका मूल्य 9 करोड़ 36 लाख 77,449 बना। ऐसे में इन्हें सात करोड़ 58 लाख 71 हजार 910 रुपये का लाभ हुआ। 

कुशलिया में अवार्ड की दर 617.59 रुपये थी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन डीएम विमल शर्मा ने इसका मुआवजा 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया। यानी 10 गुना से भी ज्यादा मुआवजा दिया गया। रनवीर सिंह की जमीन के मामले में 1235.18 की दर को आर्बिट्रेशन में बढ़ाकर 5577 रुपये किया गया।

गांव नाहल के मामलों में तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी ने 1235 रुपये की दर को आर्बिट्रेशन में बढ़ाकर 6515 एवं 5577 रुपये किया। इसके अलावा इसकी शिकायतों की जांच की इन्होंने खुद ही पर तत्कालीन सीडीओ कृष्णा करुणेश,  एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य, एसएसपी तथा एसओ मसूरी की जांच आख्या को आधार बनाकर शिकायत को निराधार मानते हुए क्लीन चिट दे दी। मंडलायुक्त ने तीनों अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की थी।

अमीन संतोष कुमार की पत्नी लोकेश बेनीवाल, मामा रनवीर सिंह व पुत्र दीपक तथा पुत्र वधू दिव्या आदि ने नाहल में 9 खसरा नंबरों की जमीन अधिसूचना जारी होने के बाद खरीदी। इसे 3 करोड़ 54 लाख 20 हजार 442 रुपये में  खरीदा गया। इसका मुआवजा बना 14 करोड़ 91 लाख 85 हजार 429 रुपये, फायदा हुआ 11 करोड़ 37 लाख 64 हजार 987 रुपये का।

कई अन्य लोग भी शामिल हैं घोटाले में 

मेरठ एक्सप्रेसवे
मेरठ एक्सप्रेसवे
दलाल : इदरीश, शाहिद पुत्र शमीम, शमीम, शाहिद पुत्र यूसुफ आदि ने रसूलपुर सिकरोड़ में जमीन 2 करोड़ 56 लाख 16 हजार 500 सौ में खरीदी और आर्बिट्रेशन के बाद 4 करोड़ 74 लाख 98 हजार 75 रुपये प्राप्त किए। लाभ हुआ दो करोड़ 18 लाख 82 हजार 250 रुपये का।

इन बैनामों में भी हुआ मुआवजे का खेल 
क्रेता            आर्बिट्रेटर              तिथि                अवार्ड        आर्बिट्रेशन दर
शिवांग राठौर    विमल शर्मा        15 जनवरी 2016       617.59         6500
रनवीर सिंह    विमल शर्मा          4 जुलाई   2016        1235.18         5577
दिव्या सिंह    निधि केसरवानी      6 फरवरी   2017       1235.18        6515
दीपक सिंह    निधि केसरवानी      6 फरवरी   2017       1482.00     6515
इदरीसए ताज    निधि केसरवानी       6 फरवरी  2017    1235.18        6500
लोकेश बेनीवाल    विमल शर्मा          4 जुलाई 2016    1235.18        5577
शाहिद, शमीम     निधि केसरवानी      6 फरवरी 2017     1235.18        6500
यूसुफ , इमरान    निधि केसरवानी       6 फरवरी 2017     1235.18        6500

जमीन की वजह से अटका है दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे 
जांच के बाद अड़ंगा लग जाने से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का करीब छह किमी का निर्माण अटका है। चार गांव डासना, कुशलिया, नाहल और रसूलपुर सिकरोड में करीब 19 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण अटका है। छह एकड़ जमीन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे में जानी है। यहां एक्सप्रेस-वे का तीन किमी का हिस्सा इसमें फंसा है।

भोजपुर क्षेत्र में जमीन के विवाद की वजह से तीन किमी हिस्से का निर्माण अटका हुआ है। इसी माह प्रधानमंत्री कार्यालय से इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की गई और एक माह में जमीन के विवादों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए थे। प्रदेश सरकार ने मामले में सख्ती की। अब यूपी कैबिनेट से अधिकारियों की जांच और कार्रवाई को लेकर फैसला लिया गया है।
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