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ट्रेन नहीं धर्मशाला बन गई हैं एक्सप्रेस गाड़ियां
भोला पांडे/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 25 Apr 2014 07:03 PM IST
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रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी ही ट्रेनों की सुरक्षा एवं यात्रियों की हिफाजत में कोताही बरत रहे हैं। नियमों की अनदेखी से ट्रेनें असुरक्षित हो गई हैं।
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स्लीपर हो या फिर एसी कोच बिना रोक-टोक कोई भी व्यक्ति आसानी से घुस जाता है। जैसे एक्सप्रेस ट्रेन नहीं धर्मशाला हो। रेल कर्मचारियों द्वारा आरक्षण बोगियाें में चढ़ने वालों पर रोक नहीं लगाने से लंबी दूरी तक सफर करने वाले यात्रियों को मुश्किल का सामना करना पड़ता है।
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दिल्ली-मुंबई रूट पर दौड़ने वाली गाड़ियों के हालात पर पेश है संवाददाता भोला पाण्डेय और फोटोग्राफर गौरव चौधरी की रिपोर्ट की दूसरी किस्त।
आरक्षित कोच में सफर करते हैं दैनिक यात्री
फरीदाबाद। इस रूट पर दिल्ली से मथुरा तक दैनिक यात्री बिना किसी डर के एक्सप्रेस व मेल गाड़ियों के आरक्षित कोच में बेधड़क सफर करते हैं। ऐसे में उन्हीें के बीच बदमाशों को भी मौका मिल जाता है।
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महिला स्पेशल ट्रेन: सिर्फ एक सुरक्षाकर्मी के भरोसे 8 बोगी
रात के 9.36 बजे प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर पहुंची दादर एक्सप्रेस की एस-5 में सफर कर रहे यात्री राहुल, मनीष व रामेश्वर का कहना था कि ट्रेनों में सुरक्षा भगवान भरोसे है। कोच में कोई भी घुस आता है। खाली बर्थ नहीं होने पर भी जबरन उस पर बैठ जाता है।
रात 9.50 बजे, रात में खुले रहते हैं गेट
ट्रेनों में स्लीपर डिब्बों की बात तो दूर सबसे सुरक्षित एसी कोच के गेट रात में खुले रहते हैं। उसे बंद करने का प्रयास नहीं किया जाता। रात में 9:50 बजे पर प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पहुंची पंजाब मेल के एसी कोच बी-2 का अवलोकन किया तो देखा कि गेट खुले हुए थे और लोग बेरोकटोक उसमें घुस रहे थे।
इस दौरान न तो टीटीई दिखाई दिया और न कोई अटेंडेंट। रात में 11.02 बजे देहरादून एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर-4 पर पहुंची। इस ट्रेन के एसी कोच तो बंद दिखाई दिए लेकिन स्लीपर के सभी कोच के गेट खुले रहे। संवाददाता ने पलवल तक एस-8 बोगी में सफर किया।
बल्लभगढ़ स्टेशन के पास टीटीई कोच में दिखाई दिया लेकिन उसने न तो टिकट के बारे में पूछा और न ही कोई टोकाटाकी की। बल्लभगढ़ स्टेशन पर करीब दर्जनभर यात्री विभिन्न आरक्षित डिब्बों में सवार हो गए और पलवल में उतरे। इस दौरान केवल एस-5 व एस-4 बोगी के गेट बंद दिखे।
रात 9.30 बजे, चौकी से गायब रहती है पुलिस
कहने को तो जीआरपी ने ओल्ड स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर चौकी खोल रखी है। लेकिन रात में चौकी पर कोई पुलिसकर्मी होगा भी या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। पलवल सफर करने से पहले संवाददाता ने रात में 9.30 बजे प्लेटफॉर्म का जायजा लिया तो देखा कि पुलिस चौकी सूनी पड़ी है।
पूरे प्लेटफार्म पर न तो जीआरपी का कोई जवान दिखा और न ही आरपीएफ का। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब प्लेटफॉर्म पर ही यात्रियाें की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है तो ट्रेनों में सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा।
नियमों की अनदेखी बन रही सुरक्षा को खतरा
नये साल पर रेलवे ने सर्कुलर जारी कर कहा था कि ट्रेन में सुरक्षाकर्मियों के लिए एक बर्थ सुनिश्चित की जाएगी। इस पर ट्रेनों के एस-1 कोच की 71 नंबर बर्थ रिजर्व कर दी गई है। हां अगर आप सुरक्षाकर्मी को ढूंढने जाएंगे तो वहां कोई पुलिसकर्मी नहीं बल्कि कोई और बैठा मिलेगा।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा ने कहा कि विभाग की ओर से सभी गाड़ियों के टीटीई को पहले से ही निर्देश है कि रात के समय कोच के गेट बंद कराना सुनिश्चित करें। गेट सिर्फ स्टेशन पर ही खुले और जिनका आरक्षण हो उन्हीें को आरक्षण कोच में सफर करने की अनुमति दें।
यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए महत्वपूर्ण गाड़ियों में चुनाव खत्म होने तक आरपीएफ व जीआरपी से तालमेल करके इंस्पेक्टर रैेंक के अधिकारियों को लगाया जा रहा है। साथ ही जनता से भी अपील है कि वह रात के समय कोच के गेट बंद करके रखें।