अमर उजाला पड़ताल-2 : विसरा प्रिजर्व.. और मौत का राज हो जाता है ‘भूला बिसरा’
- एक-एक वर्ष तक नहीं आ पाती विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट
- कई बार रिपोर्ट आने के बाद भी मौत का कारण नहीं होता स्पष्ट
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जिन मामलों में मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट नहीं होती, चिकित्सक उसका विसरा प्रिजर्व कर देते हैं। यहीं से शुरू होता है ऐसा ऐसा इंतजार जिसके खत्म होने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। लोग वर्षों तक परिजनों की मौत की वजह जानना चाहते हैं। मगर उन्हें जवाब नहीं मिलता।
विडंबना यह भी है कि विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने के बाद पुलिस की पड़ताल अटकी रहती है। वहीं, कई बार विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। इसके चलते मौत से राज जानने के लिए इंतजार कर रहे और थानों में चक्कर लगा रहे अपनों को बेहद निराशा होती है।
क्षेत्र में अक्सर आत्महत्या और अज्ञात शव मिलने के मामले सामने आते हैं। पुलिस के अनुसार, जिन व्यक्तियों के शरीर पर चोट आदि का निशान नहीं होता और पोस्टमार्टम में उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं होता।
चिकित्सक विसरा प्रिर्जव कर देते हैं। इसके बाद विसरा को प्लास्टिक के डिब्बे में बंद कर थाने ले आती है और लिखा पढ़ी की कार्रवाई कर उसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिया जाता है।
पुलिस का कहना है कि वह विसरा को अधिक देर या दिन थाने के मालखाने में नहीं रखते। इसे जल्द से जल्द विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया जाता है। पुलिस का कहना है कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में समय लगता है। ये समय कितना होगा इसका कोई अंदाजा नहीं होता। कई बार एक-एक साल तक पुलिस को विसरा रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता है।
थानों में नहीं है विसरा रखने का उपयुक्त स्थान
पेड़ पर टंगे दिखे थे खून से सने कपड़े व अन्य सामान
एक साल पहले बीटा-2 थाने में पेड़ पर किसी मृतक के कपड़े आदि पॉलिथीन में टंगे दिखाई दिए थे। इसके बाद चर्चा हुई थी कि पुलिस ने विसरा पेड़ पर टांगे हुए हैं। पुलिस ने विसरा पेड़ पर टंगे होने से इंकार करते हुए हवाला दिया था कि खून से सने कपड़ों की दुर्गंध कम करने के लिए उन्हें धूप में टांगा गया था। लेकिन वास्तव में यह समस्या हर थाने की है। रक्त, विसरा आदि अगर मालखाने में कुछ घंटे रखा जाता है तो दुर्गंध आने लगती है।
गाजियाबाद में प्रयोगशाला बनने से भी पूरी तरह राहत नहीं
पहले विसरा आदि जांच के लिए आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जाते थे। वहां से रिपोर्ट आने में एक साल से भी अधिक समय लगता था। गाजियाबाद विधि विज्ञान प्रयोगशाला बनने के बाद विसरा वहीं जांच के लिए भेजे जाते हैं। इससे रिपोर्ट आने के समय में कुछ कमी तो आई है लेकिन आज भी कई विसरा रिपोर्ट आने में छह माह से अधिक का समय लग जाता है।
मृतक के सामान आदि रखने के लिए उपयुक्त व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी थानों में इस तरह के सामान रखने के लिए स्टोर बनाने की तैयारी चल रही है। ये थाने के कार्यालय से कुछ दूरी पर बनाया जाएगा। विसरा रिपोर्ट आने में विधि विज्ञान प्रयोगशाला से देरी होती है।- रणविजय सिंह, एसपी देहात