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मौसम होगा मेहरबान, तभी थमेगा प्रदूषण का कोहराम: दोपहिया वाहन को दायरे में लाना जरूरी, सख्ती से लागू हो सम-विषम

Thu, 09 Nov 2023 10:48 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 09 Nov 2023 10:48 PM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के लिए करीब 70 फीसदी कारण स्थानीय हैं। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी सड़कों पर चलने वाले वाहनों की है। ऐसे में यदि सम-विषम योजना के दौरान वाहनों की श्रेणी बनाकर छूट दी जाती है तो योजना कारगर साबित नहीं होगी।

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Experts said Odd even should be implemented strictly in Delhi it is necessary to bring two wheelers under its
दोपहिया वाहन को सम-विषम के दायरे में लाना जरूरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में प्रदूषण से राहत के लिए मौसम के मेहरबान होने का इंतजार करना होगा। कृत्रिम बारिश व सम-विषम योजना आपातकालीन विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, इनका प्रभाव अध्ययन के बाद ही स्पष्ट होगा। बीते सालों में लागू की गई सम-विषम योजना से एक से दो फीसदी की राहत दिखी थी। ऐसे में आपात स्थिति में उठाए जा रहे कदम से स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के लिए करीब 70 फीसदी कारण स्थानीय हैं। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी सड़कों पर चलने वाले वाहनों की है। ऐसे में यदि सम-विषम योजना के दौरान वाहनों की श्रेणी बनाकर छूट दी जाती है तो योजना कारगर साबित नहीं होगी। यदि मौसम करवट ले तो एक पल में प्रदूषण खत्म हो सकता है। स्थिति सुधरने के लिए मौसम के अनुकूल होने का इंतजार करना होगा। इस बीच आपात स्थिति से निपटने के लिए हर संभव प्रयास करने होंगे।

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सीएसई में अनुसंधान और वकालत की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि कृत्रिम बारिश को लेकर अध्ययन की जरूरत होगी। सम-विषय योजना आपात स्थिति में लिया गया अस्थायी फैसला है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के मुताबिक दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण का हिस्सा लगभग 40 फीसदी है। इसमें करीब 60 फीसदी हिस्सा दोपहिया वाहनों का हिस्सा है। जबकि कार का हिस्सा 30 फीसदी है। जबकि 10 फीसदी अन्य वाहनों का है। ऐसे में सम-विषम योजना में पहले की तरह छूट नहीं देनी चाहिए। कोशिश की जानी चाहिए कि दोपहिया को भी इसकी जद में लाया जाए। ऐसा करने से प्रदूषण स्तर में तेजी से गिरावट होने का अनुमान है।

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वाहनों की संख्या करनी होगी सीमित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अपर निदेशक डॉ. डी साहा का कहना है कि सम-विषम योजना को लागू करने से प्रदूषण स्तर में एक फीसदी की राहत मिलती है। हालांकि सड़कों पर भीड़ काफी कम हो जाती है। यह एक अस्थायी नियम है। दिल्ली में प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए सिटी का क्षेत्र तय करना चाहिए। साथ ही, इस क्षेत्र में सख्ती से वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होना चाहिए। विदेशों की तरह इन क्षेत्रों में भी निजी वाहनों की मनाही होनी चाहिए। दिल्ली का मौसमी ढांचा अलग तरीके से है। ऐसे में अस्थायी फैसले से ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है। वाहनों से होने वाला प्रदूषण ग्राउंड लेवल पर रहता है। इसमें खतरनाक गैस होती है जो काफी हानिकारक है।

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