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शिक्षण संस्थान में डीएल बनाने की योजना का हो सकता है विस्तार, अगले हफ्ते तक फैसला संभव

Tue, 18 Sep 2018 04:27 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 18 Sep 2018 04:27 AM IST
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Expansion of the scheme to make DL in educational institute can be possible
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दिल्ली का परिवहन विभाग शिक्षण संस्थानों में डीएल बनाने की योजना का विस्तार देने की योजना पर काम रहा है। चार शिक्षण संस्थानों के पायलेट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम के बाद यह फैसला लिया गया है। इस बारे में सोमवार को विभागीय अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें इस योजना पर सहमति बनी है। अधिकारी हालांकि अभी शिक्षण संस्थानों की पहचान कर रहे हैं। लेकिन बताया जा रहा है दो अक्टूबर से योजना शुरू हो सकती है।        

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वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि दिल्ली सरकार डीटीयू व आईपीयू से जुड़े कालेज को योजना के दायरे में लाना चाहती है। लेकिन फिलहाल कुछ परेशानियां आ रही हैं। मसलन, डीटीयू के कॉलेजों व सेंटर पर छात्रों की संख्या कम है। वहीं, आईपीयू के ज्यादातर कॉलेज निजी हैं। जबकि नियमत: निजी कालेजों या शिक्षण संस्थानों में योजना नहीं चलाई जा सकती है। इस बारे में अगले सोमवार को फिर से बैठक बुलाई गई है, जिसमें इसका फैसला किया जाएगा।       
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गौरतलब है कि अभी शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज रोहिणी, आईटीआई पूसा, जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज और आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज में इस तरह के सेंटर पॉयलेट प्रोजेक्ट के तहत चल रहे हैं।      
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आप का एमसीडी पर हमला

आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि एमसीडी भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। पार्टी का कहना है कि पूर्वी नगर निगम में बड़े पैमाने नालों की सफाई के आड़ में गोरखधंधा चल रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व उत्तरी-पूर्वी दिल्ली लोकसभा के प्रभारी दिलीप पांडेय ने कहा नालों की सफाई का काम लगभग तीन महीने चला, जिसमें करीब सात करोड़ रुपये के खर्च पर गाद को यार्ड में डंप किया गया। दिलीप पांडेय के मुताबिक, तीन महीने में लगभग 12 हफ्ते होते हैं। लेकिन पता चला है कि 11 हफ्तों में सिर्फ 2 करोड़ रुपये खर्च हुआ। जबकि निगम ने आखिरी एक सप्ताह में 5 करोड़ रुपये खर्च डाला। पार्टी कार्यालय में सोमवार को दिलीप पांडेय ने मीडिया के सामने भाजपा से पूछा कि एक सप्ताह में कैसे पांच करोड़ रुपये खर्च हुआ। अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो भष्टाचारी का इस्तीफा लिया जाए। मामले की सीबीआई हो।      
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