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EXCLUSIVE: एम्स-सफदरजंग अस्पताल का हाल, घंटों की लाइन के बाद पता चलता है दवाई है ही नहीं

Sat, 14 Sep 2019 12:52 PM IST
पूजा त्रिपाठी परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 14 Sep 2019 12:52 PM IST
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Exclusive aiims safdarjung hospital no drugs available at janaushadhi amrit store buying outside
एम्स में जन औषधि केंद्र में लगी लाइन - फोटो : अमर उजाला

देश के दो सबसे बड़े अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और सफदरजंग अस्पताल के जनऔषधि और अमृत स्टोर में मरीजों को पूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। मजबूरन उन्हें बाहर की दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।

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केंद्र सरकार सरकार ने इन अस्पतालों में सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए जनऔषधि और अमृत स्टोर संचालित किए हैं। शुक्रवार को अमर उजाला ने जब दोनों अस्पतालों की पड़ताल की तो पता चला कि जब मरीज या उनके तीमारदार डॉक्टरों की पर्ची लेकर यहां पहुंचते हैं तो 40 से 50 फीसदी दवाएं ही उन्हें कम कीमत पर मिल पाती हैं। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ता है।
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घंटे भर लाइन में लगे फिर भी नहीं मिलीं दवाइयां
1. एम्स ओपीडी, समय सुबह 10 बजे
एम्स के गेट नंबर- 1 से राजकुमारी अमृता कौर ओपीडी ब्लॉक में पहुंचने पर यहां नोएडा सेक्टर- 12 के विक्रम सचदेवा मिले। वे अपने 12 वर्षीय बेटे हर्ष को लेकर बालरोग विभाग की ओपीडी में आए थे। यहां डॉक्टरों ने उन्हें पर्ची पर छह दवाएं लिख कर दीं। सबसे पहले उन्होंने निशुल्क दवाओं के बारे में पता किया तो गार्ड ने पास में ही मौजूद जनऔषधि की ओर भेज दिया। करीब एक घंटा लाइन में लगने के बाद उन्हें पर्ची में लिखी तीन दवाइयां ही मिलीं। इसके बाद वे आगे अमृत स्टोर की ओर बढ़े।
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यहां पता किया तो उन्हें एक और दवा मिल गई, लेकिन बाकी दो दवाओं के लिए उन्हें बाहर मेडिकल स्टोर पर जाना पड़ा। ठीक ऐसी ही कहानी बिहार के आरा निवासी विश्वास मोहन, यूपी के बदायूं निवासी राकेश शर्मा, बहादुरगढ़ निवासी मनीष कुमार और दिल्ली के मॉडल टाऊन निवासी सूरज अग्रवाल ने भी बताई। ये सभी अलग अलग विभाग की ओपीडी में अपने मरीज को लेकर आए थे। लेकिन जनऔषधि केंद्र से बाहर आने के बाद इन्होंने अमर उजाला से अपनी परेशानी बगैर कैमरे के सामने आए साझा की। 

2. सफदरजंग अस्पताल, समय दोपहर 12:16 बजे

सफदरजंग अस्पताल की ओपीडी पहुंचने पर सबसे ज्यादा मरीजों की भीड़ डॉक्टरों के कक्ष के बाहर और जनऔषधि व अमृत स्टोर पर देखने को मिली। जनऔषधि केंद्र पर मौजूद पीतमपुरा निवासी राजकुमार यादव ने बताया कि उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने जो दवाइयां लिखी हैं उनमें से एक दवा मिली है।

बाकी बाहर से लेने के लिए बोल रहे हैं। करीब सात दवाएं डॉक्टर ने लिखी थी। उन्होंने ये भी बताया कि अस्पताल में उन्हें पिछले दो दिन में कहीं भी फ्री दवाओं का काउंटर नहीं मिला है। ओपीडी के भूतल पर खड़े दरियागंज निवासी अहमद बताते हैं कि वे महीने में दो बार यहां आते हैं। इलाज से लेकर अब तक करीब 8 महीने से वे यही समस्या देख रहे हैं।

कई बार कर चुके हैं शिकायत
सफदरजंग अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश का कहना है कि अस्पताल में दवाएं न मिलने के कारण मरीज डॉक्टर की लापरवाही समझते हैं, पर यह प्रबंधन का काम है। दवाएं न मिलने के कारण मरीज और उसके परिजन कई बार डॉक्टरों से विवाद करते हैं। इसकी शिकायत कई बार प्रबंधन को कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई ही नहीं होती। ठीक इसी तरह की परेशानी एम्स के डॉ. विजय गुर्जर सहित कई डॉक्टरों ने साझा की। उन्हें अक्सर ओपीडी में मरीज भी इसकी शिकायत करते हैं। 100 रुपये का कोई इंजेक्शन बाहर से मरीज को 250 से 300 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।

दोनों ही अस्पतालों में कहीं नहीं दिखा शिकायत केंद्र
पड़ताल के दौरान मरीजों को होने वाली अव्यवस्थाओं को लेकर एम्स और सफदरजंग अस्पताल में कहीं भी शिकायत केंद्र के बारे में जानकारी नहीं मिली। जबकि दिल्ली सरकार के हर अस्पताल में जगह जगह बोर्ड लगे हुए हैं।

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