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Delhi NCR News: ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में गर्दन और पीठ दर्द की शिकायतें बढ़ा रहा
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लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना और गर्दन झुकाकर मोबाइल देखना बन रहा परेशानी की वजह
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। मोबाइल और कंप्यूटर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, लंबे समय तक स्क्रीन देखने और एक ही मुद्रा में बैठे रहने की आदत अब उनकी गर्दन, कंधे और पीठ के लिए परेशानी का कारण बन रही है। गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें किशोरावस्था के बच्चों की संख्या अधिक है।
जीटीबी अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि चिंता केवल बच्चों के स्क्रीन देखने के समय को लेकर नहीं है, बल्कि इस दौरान उनके बैठने के तरीके और शरीर की स्थिति को लेकर भी है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने और मोबाइल देखने के लिए बार-बार गर्दन झुकाने से गर्दन और पीठ की मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ सकता है। इससे दर्द और अन्य मांसपेशीय समस्याएं हो सकती हैं।
डॉ. कुमार के अनुसार, बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना व्यावहारिक समाधान नहीं है। इसके बजाय उन्हें स्क्रीन का सही तरीके से इस्तेमाल करना सिखाना जरूरी है। स्क्रीन देखते समय बीच-बीच में उठना, शरीर की मुद्रा बदलना और कुछ देर चलना-फिरना चाहिए।
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बच्चों में ‘मूवमेंट’ की आदत डालना जरूरी
डॉक्टर के मुताबिक, सही पोस्चर के साथ छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक भी जरूरी हैं। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल न देखें। स्कूलों में भी पढ़ाई के दौरान छोटे मूवमेंट ब्रेक, सही बैठने की मुद्रा और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए। बचपन से सही पोस्चर और नियमित शारीरिक गतिविधि की आदत मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी परेशानियों से बचाव में मदद कर सकती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। मोबाइल और कंप्यूटर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, लंबे समय तक स्क्रीन देखने और एक ही मुद्रा में बैठे रहने की आदत अब उनकी गर्दन, कंधे और पीठ के लिए परेशानी का कारण बन रही है। गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें किशोरावस्था के बच्चों की संख्या अधिक है।
जीटीबी अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि चिंता केवल बच्चों के स्क्रीन देखने के समय को लेकर नहीं है, बल्कि इस दौरान उनके बैठने के तरीके और शरीर की स्थिति को लेकर भी है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने और मोबाइल देखने के लिए बार-बार गर्दन झुकाने से गर्दन और पीठ की मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ सकता है। इससे दर्द और अन्य मांसपेशीय समस्याएं हो सकती हैं।
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डॉ. कुमार के अनुसार, बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना व्यावहारिक समाधान नहीं है। इसके बजाय उन्हें स्क्रीन का सही तरीके से इस्तेमाल करना सिखाना जरूरी है। स्क्रीन देखते समय बीच-बीच में उठना, शरीर की मुद्रा बदलना और कुछ देर चलना-फिरना चाहिए।
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बच्चों में ‘मूवमेंट’ की आदत डालना जरूरी
डॉक्टर के मुताबिक, सही पोस्चर के साथ छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक भी जरूरी हैं। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल न देखें। स्कूलों में भी पढ़ाई के दौरान छोटे मूवमेंट ब्रेक, सही बैठने की मुद्रा और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए। बचपन से सही पोस्चर और नियमित शारीरिक गतिविधि की आदत मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी परेशानियों से बचाव में मदद कर सकती है।