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मरने के बाद एक शख्स ने बचाई चार जिंदगियां

Tue, 30 Jun 2015 09:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 30 Jun 2015 09:06 PM IST
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Example: One person died and saved four lives.

दिल्ली में एक व्यक्ति के परिवार ने नई मिसाल कायम की है। मरने के बाद भी उस व्यक्ति के शरीर ने चार लोगों को उसने जिदंगी का अभयदान दिया।

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एक निजी अस्पताल में ब्रेन डैड घोषित किया गया 42 साल का व्यक्ति एम्स का इस वर्ष का नौवा शव दान करने वाला शव दाता बना। संस्था के निदेशक डॉ एमसी मिश्रा के मुताबिक व्यक्ति का दिल, लीवर और दो कीड़नी, चार जरूरतमंद व्यक्तियों में प्रतिरोपित किए गए।
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जबकि उसका कॉर्निया संरक्षित रखा गया। मरीज को गंभीर सर दर्द और शरीर के दाहिने हिस्से में तेज दर्द की शिकायत पर कुतुब इंस्टीट्यूशनल क्षेत्र के रॉकलैंड अस्पताल में 23 जून को भर्ती कराया गया था।
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परिवार ने लिया साहसिक फैसला

Example: One person died and saved four lives.

एम्स के अंग रिट्रीवल बैंकिंग संगठन के वरिष्ठ प्रत्यारोपण समन्वयक राजीव मैखूरी के मुताबिक अचानक एक रक्तस्रावी अटैक के बाद मरीज को ब्रैन डैड घोषित कर दिया गया था।

राजीव ने बताया कि मरीज के परिवार को जब न्यूरोसर्जन ने उसकी स्थिति के बारे में बताया तो परिवार उसके अंग दान के लिए तैयार हो गया। 24 जून को न्यूरोसर्जन ने एम्स निदेशक को बुलाया और परिवार के फैसले के बारे में बताया।

इसके बाद मरीज को एम्स के ट्रामा सेंटर में स्थानांतरित किया गया। 42 साल के इस व्यक्ति का दिल 48 साल के एक आदमी में प्रत्यारोपित किया गया जो डायलेक्टिक कार्डियोमायोपैथ से पीड़ित था।

लिवर से बची बुजुर्ग की जान

Example: One person died and saved four lives.

मरीज की कीड़नी दो अलग-अलग लोगों में प्रत्यारोपित की गई। वहीं एम्स में लीवर का कोई जरूरतमंद न होने के कारण मरीज का लिवर, इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलेरी साइंस को ऑफर किया गया।

वहां इसे 54 साल के बुजुर्ग में प्रत्यारोपित किया गया, जोकि लिवर की गंभीर समस्या से ग्रस्त था। मरीज के कॉर्निया को भविष्य में इस्तेमाल के लिए संरक्षित किया गया है।

ओआरबीओ प्रमुख आरती विज की मानें तो भारत में शव दान करने की स्थिति बेहतर हो रही है, हालांकि बड़े पैमाने पर इसमें और सुधार की जरूरत है।

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