कमर दर्द से थे परेशान इसलिए मार ली गोली
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सीबीसीआईडी के पूर्व महानिदेशक सीएल वासन ने सोमवार को गोली मारकर खुदकुशी कर ली। पुलिस के मुताबिक 1962 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी सीएल वासन (78) परिवार के साथ सी-52 सेक्टर-33 में रहते थे। वह वर्ष 1993 में डीजी सीबीसीआईडी के पद से रिटायर हुए थे।
अब सवाल ये उठता है कि ऐसा क्या हुआ इतने मेच्योर आदमी को खुद को गोली मारनी पड़ी। क्या उन पर किसी तरह का दबाव था, या किसी कार्यकाल के दौरान उन्होंने कुछ किया था, जो वह भूल नहीं पा रहे थे, इस तरह के कई सवाल उठ रहे थे।
लेकिन इन सारी बातों तब विराम लगा गया उनका लिखा हुआ सुइसाइड नोट मिला। उसमें उन्होंने लिखा था कि उनके आत्महत्या करने की वजह स्लिप डिस्क नाम की एक बीमारी है।
तड़पा देने वाले दर्द का दूसरा नाम है स्लिप डिस्क!
स्लिप डिस्क का दर्द मरीज को तड़पा देता है। हड्डी रोग विशेषज्ञों के मुताबिक रीढ़ की हड्डी की इस बीमारी में दर्द कमर से शुरू होकर पैरों तक पहुंचता है। बीमारी का इलाज उपलब्ध है जिससे दर्द से निजात मिल सकती है।
रीढ़ की हड्डी एक चेन की तरह है, जिसमें 33 हड्डियां होती हैं। इन हड्डियों के बीच में रबड़ के वॉशर जैसी संरचना होती है, जिसे डिस्क कहते हैं। डिस्क रीढ़ की हड्डियों को लिंक करती हैं।
प्रत्येक हड्डी के बीच में डिस्क कुशन का काम करती है। साथ ही हड्डियों का मूवमेंट भी इन्हीं के जरिये होता है।
इस बीमारी से क्यों होता है दर्द?
दरअसल, इस बीमारी में डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है और वह पैरों को कंट्रोल करने वाली नस (सियाटिक) को दबाती है। नस पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण दर्द होता है। पहले दर्द कमर में शुरू होता है और फिर जांघ से होते हुए पैरों तक जाता है।
इससे कमर के निचले हिस्से में डिस्क खिसकने के ज्यादा मामले प्रकाश में आते हैं। रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से यानी एल-1 से एल-5 तक में डिस्क ज्यादा खिसकती है।
आगे झुककर भारी वजन उठाने के दौरान डिस्क खिसक सकती है। वेट लिफ्टिंग में इस तरह के कई मामले सामने आते हैं। इसके अलावा आगे झुककर खांसते समय प्रेशर पड़ सकता है।
क्या है इससे बचने का इलाज?
बीमारी की स्थिति के आधार पर इसका इलाज संभव है, जिसमें फिजियोथेरेपी, डॉक्टर के परामर्श से दवाओं का सेवन, ओजोन और लेजर ट्रीटमेंट एवं ऑपरेशन शामिल हैं। ऑपरेशन में नस को टच कर रही डिस्क के हिस्से को निकाल दिया जाता है।
अपोलो अस्पताल नोएडा एवं धर्म शिला अस्पताल दिल्ली के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक सिंघल बताते हैं बीमारी की स्थिति के आधार पर इसका इलाज संभव है। इसमें फिजियोथेरेपी, डॉक्टर के परामर्श से दवाओं का सेवन, ओजोन और लेजर ट्रीटमेंट एवं ऑपरेशन शामिल हैं।
डिप्रेशन में भी व्यक्ति कर लेता है आत्महत्या
मेट्रो अस्पताल के साइकोलॉजिस्ट डॉ. फारूकी आत्महत्या के लिए मल्टीपल कारणों को जिम्मेदार मानते हैं। पूर्व डीजी के मामले में अत्यधिक दर्द के अलावा संभव है कि उन्हें परिवार से सपोर्ट न मिल रहा हो।
अधिक उम्र, इलाज से फायदा न होना और आशा की किरण न बचना आदि कारणों से संभव है वे डिप्रेशन की गंभीर स्थिति में पहुंच गए हों। ऐसे मरीजों को काउंसलिंग की जरूरत होती है जिसके जरिये उसे डिप्रेशन से निकाला जाता है।