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केजरीवावल के पूर्व मंत्री की लॉ डिग्री हुई निरस्त, वकील का लाइसेंस भी होगा रद्द
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 03 Dec 2016 09:59 AM IST
सार
- 14 कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्यवाही की अनुशंसा
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विस्तार
दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की लॉ डिग्री आखिरकार निरस्त कर दी गई। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अनुशासनात्मक समिति ने शुक्रवार को दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की लॉ डिग्री को निरस्त करने का निर्णय लिया।
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अनुशासन समिति की बैठक में हुए निर्णय के बाद अब तोमर की डिग्री अवैध हो गई है। इस बारे में अब औपचारिकताएं ही शेष हैं। विश्वविद्यालय अपने निर्णय से बार कौंसिल को भी अवगत कराएगा, जिसके बाद तोमर का वकील का लाइसेंस भी रद्द होगा।
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अनुशासनात्मक समिति की शुक्रवार को चार घंटे तक चली बैठक में न केवल तोमर की डिग्री को रद्द करने पर मुहर लगी, बल्कि इस मामले में जुड़े 14 कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की है।
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विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बैठक में फर्जी डिग्री जारी करने के मामले में चिह्नित 14 कर्मियों पर भी कार्रवाई का फैसला ले लिया गया है। इसके साथ ही मुंगेर के विश्वनाथ सिंह विधि महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य से भी जवाब तलब किया गया है।
गंवाया था कानून मंत्री का पद
उन्हें विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कमेटी की ओर से नोटिस जारी कर दी गई है। उनसे सात दिनों के भीतर पक्ष रखने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि डिग्री पर सवाल उठने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तोमर को कानून मंत्री के पद से हटा दिया था।
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस तोमर को लेकर विश्वविद्यालय भी आई थी, लेकिन वे विभागों के बारे में नहीं बता पाए। बाद में उन्होंने अपने शपथ पत्र में कहा कि उन्होंने अपना नामांकन विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज मुंगेर में कराया था।
अनुशासन समिति ने आज कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य को भी नोटिस जारी कर उनसे सात दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा है। विश्वविद्यालय इस मामले में उन पर कानूनी कार्रवाई की बात कह चुका है।
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस तोमर को लेकर विश्वविद्यालय भी आई थी, लेकिन वे विभागों के बारे में नहीं बता पाए। बाद में उन्होंने अपने शपथ पत्र में कहा कि उन्होंने अपना नामांकन विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज मुंगेर में कराया था।
अनुशासन समिति ने आज कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य को भी नोटिस जारी कर उनसे सात दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा है। विश्वविद्यालय इस मामले में उन पर कानूनी कार्रवाई की बात कह चुका है।