‘हकीमों’ पर टिकी हर दल की नजर, किसका होगा बंटाधार?
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गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट पर इस बार चुनाव में कई ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिले हैं। मतदान से पहले कांग्रेस के प्रत्याशी ने मैदान छोड़ दिया और पार्टी असहाय होकर देखती रह गई। हालांकि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अब कोर्ट के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट पर अभी तक हुए उलटफेर के बाद अब सभी दलों की निगाहें 'हकीमों' पर आकर टिक गई हैं। लेकिन ये हकीम अभी मौन होकर हवा का रुख परख रहे हैं।
एकमुश्त वोट जिनके पक्ष में जाएगा वे ‘स्वस्थ’ हो जाएंगे। लेकिन जिन प्रत्याशियों से ये अपना मुंह मोड़ेंगे उनका ‘बीमार’ होना तय है।
मैदान में नहीं है कोई हकीम
दरअसल गुर्जर और ठाकुर बाहुल्य सीट होने से हर पार्टी इन्हीं जाति के प्रत्याशियों पर पिछले पांच साल से दांव खेल रही है। इससे पहले जब खुर्जा सीट थी तो जातिवाद हावी नहीं था।
नए परिसीमन के बाद जैसे ही गौतमबुद्ध नगर सीट बनी और 2009 में पहले चुनाव हुए तो यहां पर जातियों के आधार पर ही प्रत्याशी उतारे गए। यही बात 2014 के चुनावों में भी दोहराई जा रही है।
लेकिन कोई मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में न होने से वोट किसी और को ही जाएंगे। इसलिए यह तय है कि यही मतदाता प्रत्याशी के लिए ‘हकीम’ का काम करेंगे।
किसको मिलेगी ये संजीवनी?
सभी पार्टियां यह भी स्वीकारती हैं कि चुनाव को प्रभावित करने में यहां के मुस्लिम मतदाताओं की हमेशा बड़ी भूमिका रही है। करीब पौने तीन लाख के आसपास मुस्लिम वोटर हैं।
अमूमन देखा गया है कि ये वोटर मौन रहते हैं और यह पता लगा पाना कठिन होता है कि बहुतायत की संख्या में वे किधर जाएंगे। खुर्जा, सिकंदराबाद, जेवर, दादरी आदि में सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। नोएडा के कुछ जगहों पर भी इनकी संख्या अच्छी खासी है।
अगर प्रत्याशी की बात करें तो मुस्लिम वोटरों पर सभी दावा करते हैं। सभी को यह भरोसा है कि यहां के हकीम उन्हें संजीवनी जरूर देंगे।