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हाथ धोने लायक भी नहीं ईएसआई का पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 04 Dec 2014 11:50 PM IST
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ईएसआई अस्पताल में सप्लाई होने वाले पानी की हाल ही में हुई जांच में दहला देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जांच के मुताबिक अस्पताल में मिलने वाला पानी पीने तो क्या हाथ धोने के लायक भी नहीं है।दरअसल, ईएसआई अस्पताल में आपूर्ति होने वाले पानी की समय-समय पर एक निजी कंपनी से जांच करवाई जाती है।
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हाल ही में हुई जांच में पाया गया है कि आरओ से फिल्टर होने के बाद भी पानी पूरी तरह से शुद्ध नहीं है। इसमें कुल घुलनशील ठोस (टीडीएस) की मात्रा फिल्टर के बाद भी 265 मिलीग्राम/ लीटर पाई गई है, जो कि सामान्य (80-100 मिलीग्राम/ लीटर ) से काफी ज्यादा है। जांच करने वाली कंपनी के कर्मचारी कौशल सिंह बताते हैं कि आपूर्ति होने वाले पानी में टीडीएस की मात्रा 1500 से 1600 मिलीग्राम/ लीटर के बीच है, जो कि बेहद चिंताजनक है।
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क्या है टीडीएस
पानी में कार्बनिक और अकार्बनिक तत्व होते हैं। तत्वों का कुल ठोस घुलनशील ही टीडीएस है। पानी में अच्छे तत्व (कैल्शियम, जिंक, आयरन आदि) भी होते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले भारी तत्व (लेड, पारा, कैडमियम आदि) भी। पानी का टीडीएस जितना ज्यादा होगा, उतना ही उससे शरीर को नुकसान होगा। वहीं, अच्छे तत्व भी सामान्य मात्रा में ही होने चाहिए, इनकी अधिकता से भी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा भूमिगत जल में मिट्टी भी होती है जिसका सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक है।
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कितना होना चाहिए टीडीएस
पीने के पानी में टीडीएस की मात्रा 80-100 मिलीग्राम/ लीटर होनी चाहिए। इससे अधिक टीडीएस शरीर के लिए हानिकारक है।
बालों से लेकर किडनी तक असर
पानी का कठोरपन शरीर के अंदरूनी और बाहरी सभी अंगों के लिए खतरनाक है। जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक दुबे बताते हैं कि कठोर जल का असर बालों के झड़ने और त्वचा पर चकत्ते निकलने के रूप में देखा गया है। वरिष्ठ गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संदीप गुलाटी बताते हैं ज्यादा टीडीएस युक्त पानी में लेड की मात्रा अधिक होती है, जिससे किडनी पर असर पड़ता है। वहीं, नवजात या गर्भवती महिला द्वारा ऐसे पानी के सेवन से बच्चे के दिमाग पर भी असर पड़ता है। लेड की अधिकता से लीवर खराब होता है। फ्लोरीन की ज्यादा मात्रा होने से दांतों की समस्या होती है। वहीं अधिक कॉपर से विलसंस बीमारी होती है। वहीं पेट की समस्या का सबसे बड़ा कारण दूषित पानी है।