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Delhi NCR News: यूपीआई के भुगतान पर शुल्क के पक्ष में नहीं उद्यमी व व्यापारी
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कहा- 0.04 प्रतिशत शुल्क लगाने से लोगों पर बढ़ेगा अनावश्यक बोझ, ऑनलाइन भुगतान की रफ्तार हो सकती है प्रभावित
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यूपीआई से दो हजार से अधिक के भुगतान पर 15 अक्तूबर से 0.04 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की चर्चा के बीच शहर के उद्यमियों और व्यापारियों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि यूपीआई के जरिये बड़ी संख्या में लोग रोजाना भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में लेनदेन पर शुल्क लगाया गया तो लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ेगा और ऑनलाइन भुगतान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
व्यापारियों का कहना है कि शुल्क लगने के बाद ग्राहक दो हजार रुपये से अधिक का भुगतान करने से बच सकते हैं। कुछ लोग भुगतान को दो हिस्सों में करने का विकल्प अपना सकते हैं। इससे कारोबार में अनावश्यक जटिलता बढ़ेगी। उनका यह भी कहना है कि ऑनलाइन भुगतान कम होने पर बाजार में नकदी का इस्तेमाल बढ़ सकता है, जिससे पारदर्शी लेनदेन को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
उद्यमियों के मुताबिक, सरकार को यूपीआई भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर शुल्क लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान से कारोबार में सुविधा और पारदर्शिता बढ़ी है। शुल्क लगाने से इसका असर खासकर छोटे भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर पड़ सकता है।
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छोटे भुगतान वाले प्रभावित हो सकते हैं
यूपीआई पर शुल्क लेने से ऑनलाइन भुगतान पर असर पड़ेगा। हो सकता है कि ऑनलाइन भुगतान कम हो जाए। अभी यह फैसला जल्दबाजी होगा। लोगों को लेनदेन के लिए और मौका दिया जाना चाहिए। हालांकि उद्योगों पर इसका असर कम पड़ेगा, लेकिन छोटे भुगतान करने वाले लोग प्रभावित हो सकते हैं।
-संजीव शर्मा, अध्यक्ष, आईईए
यूपीआई से काफी लेनदेन होता है, लेकिन अगर शुल्क लगने लगेगा तो लोग ऑनलाइन लेनदेन कम कर देंगे। इससे व्यापार में रुकावट आएगी। सरकार को इस फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए।- रवि शर्मा, अध्यक्ष, ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन
अगर लेनदेन पर शुल्क लगाया गया तो व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। ग्राहक दो हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान करने से बचेंगे। वे छूट मांग सकते हैं या फिर भुगतान को दो बार में कर सकते हैं। सरकार को शुल्क नहीं लगाना चाहिए।
-मुकुल गोयल, व्यापारी, जगत फार्म
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यूपीआई से दो हजार से अधिक के भुगतान पर 15 अक्तूबर से 0.04 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की चर्चा के बीच शहर के उद्यमियों और व्यापारियों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि यूपीआई के जरिये बड़ी संख्या में लोग रोजाना भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में लेनदेन पर शुल्क लगाया गया तो लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ेगा और ऑनलाइन भुगतान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
व्यापारियों का कहना है कि शुल्क लगने के बाद ग्राहक दो हजार रुपये से अधिक का भुगतान करने से बच सकते हैं। कुछ लोग भुगतान को दो हिस्सों में करने का विकल्प अपना सकते हैं। इससे कारोबार में अनावश्यक जटिलता बढ़ेगी। उनका यह भी कहना है कि ऑनलाइन भुगतान कम होने पर बाजार में नकदी का इस्तेमाल बढ़ सकता है, जिससे पारदर्शी लेनदेन को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
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उद्यमियों के मुताबिक, सरकार को यूपीआई भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर शुल्क लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान से कारोबार में सुविधा और पारदर्शिता बढ़ी है। शुल्क लगाने से इसका असर खासकर छोटे भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर पड़ सकता है।
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छोटे भुगतान वाले प्रभावित हो सकते हैं
यूपीआई पर शुल्क लेने से ऑनलाइन भुगतान पर असर पड़ेगा। हो सकता है कि ऑनलाइन भुगतान कम हो जाए। अभी यह फैसला जल्दबाजी होगा। लोगों को लेनदेन के लिए और मौका दिया जाना चाहिए। हालांकि उद्योगों पर इसका असर कम पड़ेगा, लेकिन छोटे भुगतान करने वाले लोग प्रभावित हो सकते हैं।
-संजीव शर्मा, अध्यक्ष, आईईए
यूपीआई से काफी लेनदेन होता है, लेकिन अगर शुल्क लगने लगेगा तो लोग ऑनलाइन लेनदेन कम कर देंगे। इससे व्यापार में रुकावट आएगी। सरकार को इस फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए।- रवि शर्मा, अध्यक्ष, ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन
अगर लेनदेन पर शुल्क लगाया गया तो व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। ग्राहक दो हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान करने से बचेंगे। वे छूट मांग सकते हैं या फिर भुगतान को दो बार में कर सकते हैं। सरकार को शुल्क नहीं लगाना चाहिए।
-मुकुल गोयल, व्यापारी, जगत फार्म