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Delhi NCR News: प्रदूषण फैलाया तो सरकारी एजेंसियों की भी कटेगी बिजली
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डीजेबी, एनएचएआई, मेट्रो और एनबीसीसी को डीपीसीसी के नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कई सरकारी एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें दिल्ली जल बोर्ड, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली मेट्रो और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) शामिल हैं। यह कार्रवाई निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण नियमों के उल्लंघन के कारण की गई है।
डीपीसीसी ने पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड के सीवर लाइन बिछाने के काम का निरीक्षण किया। एनएचएआई के एनएच-9 और रोहतक सड़क कॉरिडोर में पंजाबी बाग से टिकरी कलां तक जांच की गई। मुंडका मेट्रो स्टेशन और मुंडका औद्योगिक क्षेत्र के आसपास भी निरीक्षण हुआ। केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो से संबंधित कार्यों की भी जांच की गई। सरोजिनी नगर और नेताजी नगर में एनबीसीसी की परियोजनाओं के स्थलों की भी जांच की। जिन स्थलों पर निर्धारित मानकों का पालन नहीं मिला, वहां परियोजना संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कानून सभी के लिए बराबर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण के मामले में किसी को छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी विभाग या निर्माण एजेंसी कानून से ऊपर नहीं है। सरकारी परियोजनाओं पर भी वही पर्यावरणीय नियम लागू होंगे, जो निजी निर्माण कार्यों के लिए हैं। उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर निर्माण रोकने, बिजली काटने और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने जैसी कार्रवाई प्रस्तावित है।
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पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि डीपीसीसी के निरीक्षण जारी हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जाएगा। निर्माण स्थलों पर सामग्री और मलबे को ढकना अनिवार्य है। पानी का छिड़काव करना और एंटी-स्मॉग गन चलाना भी आवश्यक है। धूल रोकने वाले अवरोधक लगाना भी जरूरी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कई सरकारी एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें दिल्ली जल बोर्ड, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली मेट्रो और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) शामिल हैं। यह कार्रवाई निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण नियमों के उल्लंघन के कारण की गई है।
डीपीसीसी ने पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड के सीवर लाइन बिछाने के काम का निरीक्षण किया। एनएचएआई के एनएच-9 और रोहतक सड़क कॉरिडोर में पंजाबी बाग से टिकरी कलां तक जांच की गई। मुंडका मेट्रो स्टेशन और मुंडका औद्योगिक क्षेत्र के आसपास भी निरीक्षण हुआ। केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो से संबंधित कार्यों की भी जांच की गई। सरोजिनी नगर और नेताजी नगर में एनबीसीसी की परियोजनाओं के स्थलों की भी जांच की। जिन स्थलों पर निर्धारित मानकों का पालन नहीं मिला, वहां परियोजना संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण के मामले में किसी को छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी विभाग या निर्माण एजेंसी कानून से ऊपर नहीं है। सरकारी परियोजनाओं पर भी वही पर्यावरणीय नियम लागू होंगे, जो निजी निर्माण कार्यों के लिए हैं। उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर निर्माण रोकने, बिजली काटने और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने जैसी कार्रवाई प्रस्तावित है।
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पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि डीपीसीसी के निरीक्षण जारी हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जाएगा। निर्माण स्थलों पर सामग्री और मलबे को ढकना अनिवार्य है। पानी का छिड़काव करना और एंटी-स्मॉग गन चलाना भी आवश्यक है। धूल रोकने वाले अवरोधक लगाना भी जरूरी है।