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बिजली घोटालाः विभाग के डीजी की लापरवाही उजागर
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 05 Jun 2014 04:32 PM IST
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फरीदाबाद में बिजली बिल घोटाले में एक नया मोड़ आ गया है। घोटालों की जांच कर रही ऑडिट टीम ने पुष्टि की है कि सभी गड़बड़ियां वर्ष 2011 से हो रही थीं।
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इन गड़बड़ियों की गलत बैलेंसशीट स्थानीय कार्यालयों से मुख्यालय भेजी जा रही थी। ऑडिट टीम पिछले कई दिनों से बिजली निगम में चेक, ड्राफ्ट और इनके बदले अलग-अलग कार्यालयों से निकाले गए कैश की छानबीन में जुटी है।
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19 दिन की जांच के बाद ऑडिट टीम ने घोटाले में विभाग के डीजी(डिप्टी जनरल) बैंकिंग की ओर से लापरवाही की ओर इशारा कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, फाइनेंस एंड ऑडिट विंग की ओर से बरती गई लापरवाही की सूचना बिजली निगम डायरेक्टर वीके चौधरी को दे दी गई है।
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जिसके बाद डायरेक्टर ने विंग के मुख्य अधिकारी को तलब कर जवाब मांगा है। डायरेक्टर से लताड़ लगने के बाद विंग हरकत में है और अब सभी कार्यालयों से वर्ष 2011 से बैलेंसशीटों को दोबारा से मांगा गया है।
ऑडिट टीम के मुताबिक, प्रत्येक बिजली निगम कार्यालय से कैश और बैंकिंग ट्रांजेक्शनों जैसे ड्राफ्ट-चेक की बैलेंसशीट फाइनेंस एंड ऑडिट विंग में जाती है। उदाहरण के तौर पर किसी कार्यालय में 12 लाख रुपये भुगतान होना है, जिसमें दो लाख रुपये कैश और 10 लाख रुपये वाया ड्राफ्ट-चेक आना चाहिए था। जिसकी जानकारी बैलेंस सीट के माध्यम से दर्ज होती है।
ऐसी कई जानकारियां जांच के दौरान मिली हैं, जहां बैलेंसशीट तो मिलान हो रही है। लेकिन शीट की कई एंट्रियां सही नहीं हैं। किसी कार्यालय से अगर केवल बैंकिंग ट्रांजेक्शन ही हो रहा है तो उस पर पलट कर सवाल नहीं किया गया कि कैश का क्या ट्रांजेक्शन हुआ ही नहीं है।
इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विंग ने जांच के दौरान लापरवाही बरती है। एसई आरएस यादव ने बताया कि मुख्यालय स्तर पर अधिकारियों की बातचीत के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते है। जो जानकारी मांगी जा रही है वह उसे मुहैया करवा रहे है।