अब फिर से बढ़ेगा दिल्ली में बिजली बिल का खर्चा
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राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली 2014-15 के लिए शुरुआती छह महीने का अंतरिम बजट को संसद के दोनों सदनों ने मंजूरी दे दी।
लेखानुदान में 400 यूनिट तक बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी का प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि वर्ष 2013-14 के लिए 363.056 करोड़ रुपये की पूरक मांग की मंजूरी अतिरिक्त ली गई है।
यह राशि जनवरी-मार्च, 2014 तक के लिए बिजली पर दी गई सब्सिडी की है। मसलन अप्रैल, 2014 से उपभोक्ताओं को बिजली का पूरा बिल चुकाना होगा।
बिल पर 50 फीसदी की छूट पर थी लगा रोक
आम आदमी पार्टी ने उन दिल्लीवासियों पर दरियादिली दिखाई थी जिन्होंने अक्टूबर 2012 से लेकर अप्रैल 2013 तक बिजली के बिल नहीं भरे थे लेकिन शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पर 'करंट' दाग दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने आप के इस कदम पर रोक लगा दी है।
अपना इस्तीफा देने से दो दिन पहले यानी 12 फरवरी को अरविंद केजरीवाल की सरकार ने यह फैसला लिया था। इस फैसले के तहत उनलोगों के बिजली बिल 50 फीसदी माफ कर दिए जाएंगे, जिन्होंने अक्टूबर 2012 से लेकर अप्रैल 2013 तक बिजली के बिल नहीं भरे हैं।
इस दरियादिली से दिल्ली सरकार को 6 करोड़ रुपये का नुकसान होता। हाईकोर्ट में दाखिल एक पीआईएल में कहा गया था कि यह उनलोगों के साथ सरासर गलत होगा जिन्होंने अपना बिजली बिल इस दौरान टाइम से भरा था।
दिल्ली सरकार 1300 करोड़ रुपये नहीं कर पाई खर्च
मंत्री के भाषण में यह साफ किया गया है कि दिल्ली विधानसभा ने 2013-14 के लिए 37450 करोड़ रुपये का अनुमान पास किया था। इसमें से 16450 करोड़ रुपये योजनागत खर्च और 21 हजार करोड़ रुपये गैर योजनागत खर्च था।
सरकार ने गैर योजनागत खर्च कम करने के ठोस उपाय उठाए। इससे यह खर्च घटकर 20,273.69 करोड़ रुपये हो गया। वहीं दिसंबर, 2013 में चुनाव के कारण तीन-चार महीने नई योजनाएं शुरू नहीं हो सकी।
अत: 16450 करोड़ रुपये योजनागत राशि का अनुमान मार्च, 2014 तक 15150 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।