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बिजली बिल घोटाला: 25 लाख रुपये के 54 ड्राफ्ट गायब
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 29 May 2014 03:10 AM IST
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बिजली निगम के सेक्टर-25 स्थित कार्यालय से भी लाखों का घोटाला सामने आया है। ऑडिट टीम ने बुधवार को कार्यालय में विभिन्न खातों की जांच की। इस दौरान टीम ने पाया कि 54 ड्राफ्ट और उसकी एंट्रियां गायब हैं, जिसकी रकम लगभग 25 लाख रुपये है।
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जांच के दौरान टीम ने पाया कि बड़ी संख्या में ऐसी ट्रांजेक्शन आई, जिनकी जानकारी कार्यालय में नहीं थी। बिजली निगम कार्यालय में 54 ड्राफ्ट जमा होने थे, लेकिन इन सभी की कोई जमा एंट्री नहीं है।
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सभी ड्राफ्ट एचडीएफसी बैंक के थे, जिसके बाद टीम ने गायब ड्राफ्टों की एक सूची एनएच-पांच कार्यालय में भेजी। इसके साथ ही दोनों कार्यालयों में जाने वाले कलेक्शन एजेंटों की जानकारी संबंधित बैंक से मांगी है। टीम ने कुछ एजेंटों से पूछताछ की है।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गायब एंट्रियाें की रकम करीब 25 लाख रुपये की है। यह पैसा कहां गया कुछ पता नहीं। स्थानीय अकाउंट अधिकारियों से भी इस बारे में जवाब मांगा गया है। क्योंकि ड्राफ्ट की एंट्रियां क्यों नहीं हुईं इस बारे में उनके पास भी कोई जवाब होना चाहिए। एसई आरएस यादव ने बताया कि घोटालों में ठेका कर्मियों की भूमिका शक के घेरे में है। संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। कुछ कार्यालयों में बिजली निगम की स्थानीय ऑडिट टीम भी जांच में जुट गई है, जो सीधे तौर पर मुख्यालय की टीम से संपर्क में है।
एक और बैंक पर शक का घेरा
फरीदाबाद। एचडीएफसी बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बाद बुधवार को बिजली निगम घोटाले में विजया बैंक का नाम भी सामने आया है। ऑडिट टीम ने सब डिवीजन नंबर-एक, दो एवं पांच में जांच के दौरान इस बात की पुष्टि की। सब डिवीजन नंबर-दो और पांच के सैकड़ों उपभेाक्ता ऐसे हैं जो विजया बैंक द्वारा अपने बिजली बिलों का भुगतान करते हैं।
बुधवार सुबह से लेकर दोपहर तक चली जांच में टीम ने पाया कि कई चेकों, ड्राफ्टों की एंट्रियां बिजली निगम और बैंक में एक जैसी नहीं हैं। विजया बैंक के रिकॉर्ड में ऐसी गड़बड़ी देखने को मिली है। टीम से मिली जानकारी के अनुसार कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जहां बैंक कर्मचारी उपभोक्ताओं से ड्राफ्ट या चेक ले गए। लेकिन उन चेकों को किसी और कार्यालय में जाकर कैश करवा लिया। इस घोटाले में बैंक कर्मचारियों ने बिजली निगम के ठेका कर्मचारियों की सहायता ली है। एसई आरएस यादव ने बताया कि विजया बैंक की सूचना मुख्यालय को दी गई है।
हटाए जा सकते हैं ठेका कर्मी
करोड़ों रुपये का बिजली बिल घोटाला सामने आने के बाद बिजली निगम में काम कर रहे ठेका कर्मियों पर गाज गिर सकती है। इन कर्मचारियों को कैश व ड्राफ्ट कलेक्शन से हटाया जा सकता है।
बुधवार को मुख्यालय की ऑडिट टीम ने एसई आरएस यादव के साथ हुई बैठक के दौरान इस बात के संकेत दिए। करोड़ों रुपये के घोटाले के बाद विभाग सकते में है। चार लाख उपभोक्ताओं के खातों को खंगाला जा चुुका है। जबकि अभी हजारों उपभोक्ताओं की जांच बाकी है।
गौरतलब है कि करीब 10 दिन से ऑडिट टीम जिले के विभिन्न बिजली निगम कार्यालयों की जांच पड़ताल में जुटी है। इस दौरान सब डिवीजन नंबर-तीन से तीन करोड़ रुपये और सब डिवीजन नंबर चार से 2.70 करोड़ रुपये का घोटाला मिला है। जबकि पाली, सेक्टर-25, सब डिवीजन नंबर-एक, दो, पांच से आए दिन लाखों के घोटालों की पुष्टि हो रही है। गड़बड़ियों को देखते हुए बिजली निगम के एमडी अरुण कुमार ने सभी ठेका कर्मचारियों की सूची मांगी है।