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यमुना एक्सप्रेस वे पर बनेंगे चार्जिंग स्टेशन, दौड़ेंगे इलेक्ट्रिक वाहन, प्रदूषण से मिलेगी राहत
Tue, 25 Dec 2018 05:51 AM IST
Vikas Kumar
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 25 Dec 2018 05:51 AM IST
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इलेक्ट्रिक वाहन
- फोटो : अमर उजाला
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विद्युत मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित 12 इलेक्ट्रिक कॉरिडोर की सूची में दिल्ली से आगरा तक के यमुना एक्सप्रेस वे को भी शामिल किया गया है। इलेक्ट्रिक कॉरिडोर के बाबत मंत्रालय की ओर से दिशानिर्देश जारी किया गया है। इसका मकसद भविष्य में बिजली चालित वाहनों को फायदा पहुंचाना होगा। साथ ही प्रदूषण से निजात पाना भी मकसद होगा।
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दरअसल, देश भर में बिजली चालित वाहनों के प्रचार प्रसार की सरकार की योजना है। इसके तहत नेशनल हाइवे फॉर इलेक्ट्रिक व्हीकल 2020 (एनएच फॉर ईवी 2020) कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है। इसी कड़ी में जून में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस डिविजन की ओर से दिल्ली-आगरा और दिल्ली-जयपुर को देश का पहला विद्युत कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव नीति आयोग और संबंधित मंत्रालयों से साझा किया गया था।
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इसके बाद इसे जमीनी हकीकत पर उतारने के लिए कुछ और उपाय किए गए। इसी कड़ी में विद्युत मंत्रालय ने यह गाइडलाइंस जारी किए। इसमें कॉरिडोर पर प्रत्येक 100 किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन और 25 किलोमीटर पर चार्जिंग स्टॉप्स लगाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा घरों व कार्यालयों में भी इस तरह का चार्जिंग स्टेशन लगाने का विकल्प होगा। खास बात यह कि चार्जिंग स्टेशन के लिए किसी तरह के लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है। केवल मानक पर खरा उतरने के लिए कुछ तय नियमों के तहत इसका निर्माण करना होगा।
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पहले चरण की योजना
पहले चरण में यमुना एक्सप्रेस वे पर 8 चार्जिंग स्टेशन चिह्नित किए गए हैं। जबकि नोएडा-ग्रेना एक्सप्रेस वे पर अपेक्षित आबादी के अनुपात में इसके नए सरफेस प्लान चार्जिंग स्टेशन दिए जाने की अनुशंसा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की ओर से सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट को भेजी जा रही है। इसके बाद ईज ऑफ डूइंग बिजनेस डिविजन इसमें निवेश और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को आवंटन प्रक्रिया के लिए पूरी रिपोर्ट नीति आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजेगा।
यह भी होगा फायदा
एक्वा मेट्रो के शुरू होने के बाद पर्यटकों को आगरा जाने के लिए दिल्ली से ग्रेटर नोएडा तक मेट्रो सेवा लेने के बाद आगे के लिए इलेक्ट्रिक कैब की सुविधा मिल सकेगी। गोवा और अन्य देशों की तर्ज पर कैब ऑपरेटर यहां भी सेल्फ ड्राइव गाड़ियां उपलब्ध करा सकेंगे। इलेक्ट्रिक गाड़ियों को सुरक्षा की दृष्टि से तकनीकी निगरानी में रखा जाएगा।
यमुना एक्सप्रेस वे को इलेक्ट्रिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने के लिए विद्युत मंत्रालय ने अपनी सूची में शामिल किया है। इसी कड़ी में मंत्रालय की ओर से दिशानिर्देश भी जारी किया गया है। वहीं इससे पहले चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए जरूरी संसाधनों को जो कंपनियां सप्लाई करेंगी। उसका भी चयन कर लिया गया है। अब इसकी आखिरी चरण की प्रक्रिया पूरे समयबद्ध तरीके से चल रही है। - अभिजीत सिन्हा, कार्यक्रम निदेशक, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रोग्राम