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माननीयों के चुनाव प्रचार पर रोक का तुरंत आदेश देने से इनकार
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 03 May 2017 09:20 AM IST
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- फोटो : SELF
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हाईकोर्ट ने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों (माननीयों) के अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग याचिका पर तुरंत कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने कहा कि वे बिना सुनवाई के इस याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश आंखें बंद करके नहीं देंगे।
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खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए 5 जुलाई की तारीख तय करते हुए कहा कि वे विस्तृत सुनवाई के बाद ही निर्णय देंगे। याची रिटायर्ड उपनिरीक्षक मोहन सिंह शर्मा ने तर्क रखा कि मंत्री, सांसद व विधायक चुने जाने के बाद निष्पक्षता की शपथ लेते हैं।
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उनसे आशा की जाती है कि वे देश के लिए काम करेंगे और अपने कार्यकाल में किसी राजनीतिक पार्टी के लिए काम नहीं करेंगे। मगर उक्त सभी चुनावों में राजनीतिक पार्टियों के लिए प्रचार करते हैं और मतदाताओं को प्रभावित करते हैं।
याची ने अदालत में कहा कि कानूनन सभी मंत्री, सांसद व विधायक जनसेवक की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उन पर चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। वे मात्र अपना वोट किसी भी पार्टी को देने के लिए स्वतंत्र हैं।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता रिपूदमन भारद्वाज ने याचिका के औचित्य पर सवाल उठाते हुए तर्क रखा कि यह याचिका विचार योग्य ही नहीं है। इसके अलावा इस प्रकार का आदेश देना इस अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ऐसे में याचिका खारिज की जाए।