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Delhi : चांदनी चौक सीट पर पुराने प्रतिद्वंद्वियों में है चुनावी जंग, मुकाबले में अग्रवाल और खंडेलवाल

Wed, 22 May 2024 05:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 May 2024 05:02 AM IST
सार

इस सीट से आठवीं बार चुनाव लड़ रहे जेपी प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों को तवज्जो दे रहे हैं जबकि खंडेलवाल इलाके का विकास कराने के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दे उठाते हुए वोट मांग रहे हैं। अमर उजाला संवाददाता विनोद डबास की दोनों उम्मीदवारों से हुई बातचीत के मुख्य अंश...

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Election battle between old rivals on Chandni Chowk seat of Delhi
दिल्ली की सबसे ऊंची इमारत से ऐसा दिखता है चांदनी चौक का इलाका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की हेरिटेज सीट चांदनी चौक से कांग्रेस ने जेपी अग्रवाल को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने व्यापारी नेता प्रवीन खंडेलवाल पर दांव लगाया है। दोनों ही उम्मीदवार पुरानी दिल्ली के रहने वाले हैं और परिजन भी चांदनी चौक में राजनीति कर चुके हैं। इस तरह यहां पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच टक्कर है। इस सीट से आठवीं बार चुनाव लड़ रहे जेपी प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों को तवज्जो दे रहे हैं जबकि खंडेलवाल इलाके का विकास कराने के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दे उठाते हुए वोट मांग रहे हैं। अमर उजाला संवाददाता विनोद डबास की दोनों उम्मीदवारों से हुई बातचीत के मुख्य अंश...

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आप कार्यकर्ता कर रहे ईमानदारी से कार्य: जेपी अग्रवाल

गर्मी अधिक है, ऐसे में किस तरह प्रचार कर रहे हैं।
मतदाताओं का उत्साह देखकर एक पल भी आराम करने का मन नहीं करता है। मतदाता बड़ी संख्या में सभाओं व दौरों में शामिल हो रहे हैं। इस कारण वह सुबह से लेकर रात 10 बजे तक लगातार प्रचार कर रहा हूं।

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क्षेत्र से दो बार भाजपा के सांसद जीते। उन्हें आप कितना सफल मानते हैं।
भाजपा की केंद्र सरकार ने चांदनी चौक क्षेत्र की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इस कारण क्षेत्र का विकास नहीं हो सका और यहां समस्याओं का अंबार है। जबकि चांदनी चौक हेरिटेज सिटी है और यहां पर देश-विदेश के लोग आते है। सभी बड़े ही दुखी होकर लौटते हैं।
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आप को वोट क्यों दें। प्राथमिकता क्या होगी।
क्षेत्र को हेरिटेज हब बनाया जाएगा। यहां पर मनोरंजन के विभिन्न कार्यक्रम कराए जाएगे। इसके अलावा सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होगा और यमुना के घाटों और रिवर फ्रंट को विकसित कर सुंदर पर्यटन स्थल तैयार किया जाएगा। डीडीए की व्यर्थ जमीन को जनहित में विकसित करवाया जाएगा। जाम समेत समस्त समस्याओं को समाधान कराया जाएगा।

आप की नजर में विपक्षी उम्मीदवार की क्या मजबूती है।
भाजपा उम्मीदवार कभी भी जनता से जुड़े नहीं रहे। इस कारण जनता व इलाके की समस्याओं के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। इतना ही नहीं उन्हें जनता जानती भी नहीं है, जबकि मैं लगातार जनता के बीच रहा और पार्टी संगठन में कार्य किया है।

गठबंधन का कितना लाभ मिल रहा है।
कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं की भांति आप के नेता व कार्यकर्ता भी हमें जिताने में जुटे हुए हैं। लगातार सभाएं व अन्य कार्यक्रम करा रहे हैं।वे अपनी पार्टी के समर्थकों को मेरा समर्थन करने की अपील कर रहे है। इस कारण आप से जुड़े मतदाता पक्ष में हर हाल में वोट डालेंगे।
 

गठबंधन राजनीतिक अवसरवादिता का उदाहरण : प्रवीन

गर्मी अधिक है, ऐसे में किस तरह प्रचार कर रहे हैं।
निश्चित रूप से गर्मी अधिक है, लेकिन प्रचार भी नहीं छोड़ना है। जन समर्थन मिल रहा है। इससे उत्साह एवं ऊर्जा में कोई कमी नहीं है। साथी कार्यकर्ताओं का उत्साह भी थकान को महसूस नहीं होने देता।

आप को वोट क्यों दें। प्राथमिकता क्या होगी।
सांसद डॉ हर्षवर्धन ने क्षेत्र की जनता की खूब सेवा की है। इसके अलावा कार्य करने में भी कोई कोताही नहीं बरती। उनके कार्यकाल में क्षेत्र में कई सुविधाएं उपलब्ध हुईं, लेकिन अभी काफी काम और करना बाकी है जिसे पूरा करना है।

आपकी सबसे बड़ी क्या मजबूती है।
प्रधानमंत्री ने 10 वर्षों में कार्यों से विकास और विश्वास की बड़ी रेखा खींची है और लोगों के दिलों में विश्वास पैदा किया है। इसके अलावा चांदनी चौक को देश में एक मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित कराया जाएगा। इस बारे में संकल्प पत्र जारी किया है। फुटपाथ पर बैठकर लोगों से संपर्क और संवाद किया जाएगा।

गठबंधन का कितना असर होगा।
विपक्षी उम्मीदवार की कोई मजबूती नहीं है। कभी दूसरे क्षेत्र में जाते हैं तो कभी इस क्षेत्र में जाते हैं। इस कारण क्षेत्र की जनता का वह विश्वास खो चुके हैं। इस कारण दो चुनाव हार चुके है। इससे साबित होता है कि जनता उन्हें नकार चुकी है और इस बार भी जनता समर्थन नहीं देगी।



गठबंधन को कितनी चुनौती मान रहे हैं।
यह गठबंधन नहीं है, बल्कि राजनीतिक अवसरवादिता का खुला उदाहरण है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए भ्रामक वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गठबंधन में शामिल पार्टियों के नेता एक-दूसरे का अंदरखाने विरोध कर रहे हैं। जनता को इस बारे में भलीभांति मालूम है। इस कारण चुनाव में गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ेगा।

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