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दिल्ली विधानसभा चुनावः हॉट सीट बल्लीमारन सीट में वर्तमान और पूर्व मंत्री में जंग
Sat, 25 Jan 2020 06:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 25 Jan 2020 06:02 AM IST
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imran hussain, aap
- फोटो : himanshu soni
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दिल्ली सरकार के वर्तमान मंत्री इमरान हुसैन की विधानसभा की राह इस बार आसान नही है। कांग्रेस और भाजपा के मजबूत उम्मीदवार उनको कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कांग्रेस से हारून यूसुफ दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री व बल्लीमारान सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं।
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वहीं, सियासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली पूर्व पार्षद लता की भी इलाके में मजबूत पकड़ है। हालांकि, भाजपा 1993 से 2015 तक के विधानसभा चुनावों में एक बार भी इस सीट को अपने खाते में नहीं कर सकी है।
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चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बल्लीमारान विधानसभा दिल्ली की ऐसी सीटों में से एक है, जिस पर सभी की निगाहें हैं। मुस्लिम बहुल बल्लीमारान इलाके को मशहूर शायर मिर्जा गालिब की धरती के तौर पर भी याद किया जाता है।
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गालिब की हवेली यहीं पर हैं। लजीज व्यंजनों, जूते-चप्पलों और खासतौर पर चश्मे के बाजारों के लिए मशहूर इस सीट पर मुकाबला रोचक होने के आसार है। दिल्ली सरकार के एक मौजूदा व एक पूर्व मंत्री और एक पूर्व पार्षद के बीच का सियासी मुकाबला तीनों के दांत खट्टे कर रहा है।
ताकत, कमजोरी और समीकरण
आम आदमी पार्टी: इमरान हुसैन
मजबूती:
1. बतौर मंत्री राशन वितरण से जुड़ी आम समस्याओं का करवाया निपटारा।
2. निजी तौर पर सभी समुदायों में संपर्क।
3. कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क।
--
कमजोरी:
1. मंत्री होने से आम लोगों से संपर्क में कमी।
2. मुस्लिम समुदाय के सर्वमान्य नेता नहीं।
3. समुदाय के दो उम्मीदवारों में वोटों के बंटवारे के आसार।
भाजपा: लता सोढ़ी
मजबूती:
1. पृष्ठभूमि राजनीतिक होने से पहचान का संकट नहीं।
2. पार्षद होने से इलाके की छोटी-बड़ी हर समस्या की समझ।
3. भाजपा से लंबे अरसे से जुड़ी होने से कार्यकर्ताओं का साथ।
कमजोरी:
1. मुस्लिम बहुल सीट को अपने हक में लाना।
2. निगम के कामों से खफा लोगों की नाराजगी का दूर करना मुश्किल।
3. एक मंत्री व एक पूर्व मंत्री की तुलना में कद छोटा।
कांग्रेस: हारून यूसुफ
मजबूती:
. दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री व पांच बार विधायक रहने से इलाके में पहचान।
. शीला दीक्षित सरकार में बतौर मंत्री कराए गए काम का भी सहारा।
. मुस्लिम बहुल सीट पर उम्मीदवारी।
कमजोरी:
. 2013 से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरना।
. एक समुदाय के दो उम्मीदवारों में वोट का बंटवारा संभव।
. सत्ता से बाहर होने से आम लोगों में पकड़ कमजोर।
इलाके का जातीय समीकरण:
1. मुस्लिम: 48 फीसदी
2. अनुसूचित जाति: 20 फीसदी
ए. धनक: 8 फीसदी
बी. जाटव: 4 फीसदी
सी. वाल्मीकि: 4 फीसदी
डी. अन्य: 4 फीसदी
3. सामान्य: 15 फीसदी
ए. वैश्य: 5 फीसदी
बी. पंजाबी: 4 फीसदी
सी. अन्य: 6 फीसदी
4. ओबीसी: 7 फीसदी
5. मिश्रित आबादी: 10 फीसदी
2015 चुनाव के विनर और रनर प्रत्याशी
पार्टी नाम मिले वोट
आप इमरान हुसैन 57118
भाजपा श्याम लाल मोरवाल 23241
मजबूती:
1. बतौर मंत्री राशन वितरण से जुड़ी आम समस्याओं का करवाया निपटारा।
2. निजी तौर पर सभी समुदायों में संपर्क।
3. कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क।
--
कमजोरी:
1. मंत्री होने से आम लोगों से संपर्क में कमी।
2. मुस्लिम समुदाय के सर्वमान्य नेता नहीं।
3. समुदाय के दो उम्मीदवारों में वोटों के बंटवारे के आसार।
भाजपा: लता सोढ़ी
मजबूती:
1. पृष्ठभूमि राजनीतिक होने से पहचान का संकट नहीं।
2. पार्षद होने से इलाके की छोटी-बड़ी हर समस्या की समझ।
3. भाजपा से लंबे अरसे से जुड़ी होने से कार्यकर्ताओं का साथ।
कमजोरी:
1. मुस्लिम बहुल सीट को अपने हक में लाना।
2. निगम के कामों से खफा लोगों की नाराजगी का दूर करना मुश्किल।
3. एक मंत्री व एक पूर्व मंत्री की तुलना में कद छोटा।
कांग्रेस: हारून यूसुफ
मजबूती:
. दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री व पांच बार विधायक रहने से इलाके में पहचान।
. शीला दीक्षित सरकार में बतौर मंत्री कराए गए काम का भी सहारा।
. मुस्लिम बहुल सीट पर उम्मीदवारी।
कमजोरी:
. 2013 से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरना।
. एक समुदाय के दो उम्मीदवारों में वोट का बंटवारा संभव।
. सत्ता से बाहर होने से आम लोगों में पकड़ कमजोर।
इलाके का जातीय समीकरण:
1. मुस्लिम: 48 फीसदी
2. अनुसूचित जाति: 20 फीसदी
ए. धनक: 8 फीसदी
बी. जाटव: 4 फीसदी
सी. वाल्मीकि: 4 फीसदी
डी. अन्य: 4 फीसदी
3. सामान्य: 15 फीसदी
ए. वैश्य: 5 फीसदी
बी. पंजाबी: 4 फीसदी
सी. अन्य: 6 फीसदी
4. ओबीसी: 7 फीसदी
5. मिश्रित आबादी: 10 फीसदी
2015 चुनाव के विनर और रनर प्रत्याशी
पार्टी नाम मिले वोट
आप इमरान हुसैन 57118
भाजपा श्याम लाल मोरवाल 23241