{"_id":"5deeb72e8ebc3e880e394e93","slug":"eight-people-from-the-same-family-died-in-the-factory","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौत की फैक्टरी में एक साथ ही बुझ गए खानदान के आठ चिराग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौत की फैक्टरी में एक साथ ही बुझ गए खानदान के आठ चिराग
Tue, 10 Dec 2019 02:35 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 10 Dec 2019 02:35 AM IST
विज्ञापन
Delhi Fire
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मौत की फैक्टरी में समस्तीपुर के गांव हरिपुर के एक ही खानदान के 8 कामगारों की मौत हो गई। यहां पहुंचे लाल मोहम्मद ने बताया कि उनके भतीजे 20 वर्षीय नौशाद सहित एक ही कुनबे के 8 मृतकों की पहचान हो गई है। इनमें अताउल, महबूब, अनवर, सुजीद आदि हैं। गंभीर रूप से जख्मी मो. असलम और सुहैब का इलाज चल रहा है।
इधर, एक कारीगर फरीद का शव लेकर सोमवार शाम लेडी हार्डिंग अस्पताल से एंबुलेंस रवाना हुई। यहां उसके अब्बू मो. अलीम, भाई और मां भी थे, जिनकी आंखों से आंसुओं का सैलाब थम नहीं रहा था। बेटे का शव देख बार-बार बेहोश हो रही फरीद की अम्मी को लेकर छोटा भाई नजीर ट्रेन से गांव के लिए रवाना हुआ। पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल से निकलते हर शव के साथ हर तरफ से बिलखने और चीखने की आवाजें पीड़ित परिवारों के जख्म ताजा कर रही थीं।
बिहार में सहरसा के गांव नरियार में रहने वाले मो. अलीम ने बताया कि फरीद की तीन छोटी बहनें और एक छोटा भाई नजीर हैं। हर बार वह उनके लिए खिलौने, लंच बॉक्स सहित कई जरूरी चीजें लेकर घर पहुंचता था। मो. अलीम ने बताया कि फरीद यहां 5-6 साल से काम कर रहा था। 4-6 महीने बाद वह गांव पहुंचता तो जश्न का माहौल होता था। घर में उसकी शादी के लिए तैयारियां चल रही थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इधर, एक कारीगर फरीद का शव लेकर सोमवार शाम लेडी हार्डिंग अस्पताल से एंबुलेंस रवाना हुई। यहां उसके अब्बू मो. अलीम, भाई और मां भी थे, जिनकी आंखों से आंसुओं का सैलाब थम नहीं रहा था। बेटे का शव देख बार-बार बेहोश हो रही फरीद की अम्मी को लेकर छोटा भाई नजीर ट्रेन से गांव के लिए रवाना हुआ। पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल से निकलते हर शव के साथ हर तरफ से बिलखने और चीखने की आवाजें पीड़ित परिवारों के जख्म ताजा कर रही थीं।
विज्ञापन
बिहार में सहरसा के गांव नरियार में रहने वाले मो. अलीम ने बताया कि फरीद की तीन छोटी बहनें और एक छोटा भाई नजीर हैं। हर बार वह उनके लिए खिलौने, लंच बॉक्स सहित कई जरूरी चीजें लेकर घर पहुंचता था। मो. अलीम ने बताया कि फरीद यहां 5-6 साल से काम कर रहा था। 4-6 महीने बाद वह गांव पहुंचता तो जश्न का माहौल होता था। घर में उसकी शादी के लिए तैयारियां चल रही थीं।
विज्ञापन