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13 घंटे तक अस्पतालों के चक्कर काटती रही आठ महीने की गर्भवती, आखिरकार एंबुलेंस में ही हो गई मौत

Sat, 06 Jun 2020 08:41 PM IST
प्राची प्रियम पीटीआई, नोएडा
पीटीआई, नोएडा Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 06 Jun 2020 08:41 PM IST
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Eight months pregnant woman dies in ambulance as no hospital agrees to admit her saying unavialability of beds
सांकेतिक तस्वीर

सुविधाओं के मामले में देश के सबसे अव्वल शहरों में शामिल नोएडा में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था की क्या हालत है, इसका शनिवार की घटना ने पर्दाफाश कर दिया है। शहर के आधा दर्जन से भी अधिक अस्पतालों से नकार दिए जाने के बाद एंबुलेंस में पड़ा गर्भवती नीलम का शव और उसकी कोख में मृत आठ महीने का अजन्मा मासूम जिले की स्वास्थ्य सुविधा पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है। 

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गौतमबुद्ध नगर से खोड़ा इलाके की रहने वाली नीलम (30) के परिवार वालों ने शनिवार को बताया कि आठ महीने की गर्भवती नीलम को भर्ती कराने के लिए उसके पति विजेंद्र सिंह ने सरकारी और निजी समेत कुल आठ अस्पतालों में गुहार लगाई। विजेंद्र पत्नी नीलम को लेकर 13 घंटे तक दौड़-भाग करते रहे, लेकिन अस्पतालों ने बेड का हवाला देते हुए उसे भर्ती करने से मना कर दिया। 
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हर बार निराशा हाथ लगने के बाद अगले अस्पताल से मदद की उम्मीद लिए बीते 13 घंटे से चल रही दौड़-भाग ग्रेटर नोएडा में थम गई। असहनीय पीड़ा के आगे गर्भवती नीलम हार गई और उसने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया।
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इस मामले का संज्ञान लेते हुए गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। नीलम के पति ने बताया कि बीते आठ महीने से शिवालिक अस्पताल में नीलम का इलाज चल रहा था। शुक्रवार को उस अस्पताल में नीलम को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद मजबूरी में उन्हें दूसरे अस्पतालों की ओर भागना पड़ा।
 

पति विजेंद्र ने पूरी घटना को लेकर एक वीडियो में भी सबकुछ बताया है। वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में विजेंद्र बता रहे हैं कि शिवालिक अस्पताल द्वारा मना किए जाने के बाद सबसे पहले हम ईएसआई अस्पताल गए। इसके बाद सेक्टर 30 स्थित एक अस्पताल, फिर शारदा अस्पताल और उसके बाद जिम्स, ग्रेटर नोएडा। लेकिन सभी जगह नीलम को भर्ती करने से मना कर दिया गया। 

उन्होंने बताया कि परिवारवालों ने जयपी, फोर्टिस (नोएडा) और मैक्स अस्पलात (वैशाली, गाजियाबाद) में भी बातचीत की, लेकिन बताया गया कि कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं है। गौतमबुद्ध नगर से जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त जिलाधिकारी मुनिंद्र नाथ उपाध्याय और मुख्य चिकित्साधिकारी दीपक ओहरी इस मामले की जांच करेंगे।

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