यादव सिंह केस की लटकी जांच 8 घंटे में हुई पूरी
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यादव सिंह के ठिकानों पर मंगलवार को सीबीआई का छापा पड़ते ही आठ माह से लंबित पड़ी जांच की रिपोर्ट महज आठ घंटे में सामने आ गई। साथ ही नोएडा प्राधिकरण की तरफ से यादव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम व गंभीर धाराओं में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई।
एफआईआर में नोएडा प्राधिकरण ने तीन प्रमुख जांच रिपोर्ट को आधार बनाया, जिसमें इनकम टैक्स के ज्वाइंट डायरेक्टर एसके यादव, शासन के संयुक्त सचिव देवी प्रसाद और जस्टिस अमरनाथ वर्मा की रिपोर्ट शामिल हैं।
जो एफआईआर 8 दिसंबर 2014 को दर्ज हो जानी थी, वह आठ माह बाद 4 अगस्त को रात 8:35 पर सेक्टर-20 थाने में दर्ज की गई।
आनन-फानन में दर्ज हुई एफआईआर
इतना ही नहीं सीबीआई की छापेमारी के बाद यादव सिंह के भ्रष्टाचार की पूरी कहानी रिपोर्ट के रूप में राज्य सरकार के संयुक्त सचिव देवी प्रसाद ने सीईओ नोएडा अथॉरिटी और जस्टिस अमरनाथ वर्मा ने मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी।
यह रिपोर्ट मंगलवार सुबह 9 बजे से सीबीआई की छापेमारी के बाद आठ घंटे में जारी की गई और आनन-फानन में एफआईआर दर्ज कराई गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जल विभाग के अकाउंटेंट प्रदीप कुमार शर्मा ने शपथपत्र दिया है कि 2003 से अब तक यादव सिंह टेंडर जारी करने के एवज में कमीशन लेता रहा है। जिस समय यादव सिंह के घर पर छापेमारी की जा रही थी, उस समय वह असिस्टेंट प्रोजेक्टर इंजीनियर रामेंद्र सिंह के घर पर था।
एसआईसी सेल के हवाले जांच
यादव सिंह मामले की जांच पुलिस नहीं बल्कि स्पेशल इनवस्टिगेशन सेल (एसआईसी) करेगी। इसमें एसपी मानवाधिकार राम किशोर शर्मा समेत कुल आठ सदस्य हैं।
सीआईसी का सुपरविजन डीआईजी मेरठ रमित शर्मा करेंगे। एसपी मानवाधिकार राम किशोर शर्मा के मुताबिक डीजीपी का आदेश पत्र प्राप्त हुआ है। यादव सिंह के खिलाफ नोएडा में दर्ज हुए मामले की जांच सीआईसी करेगी।
सेल में एक एडिशनल एसपी, एक डीएसपी और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं। दो दिन के भीतर सीआईसी की टीम नोएडा जांच करने पहुंच जाएगी।