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दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण से उबारने की कारगर योजना नदारद
Sat, 06 Jul 2019 05:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 06 Jul 2019 05:39 AM IST
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केंद्रीय बजट में दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण से उबारने की कारगर योजना नदारद है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र विशेष के लिए कुछ इंतजाम किए गए हैं, लेकिन इसमें वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाने की कोई ठोस योजना नहीं है और न ही यमुना नदी को पुनर्जीवित करने का विस्तृत खाका।
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लिहाजा दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषणमुक्त किेए जाने की उम्मीद इस बजट से नहीं दिखती। मौजूदा केंद्र सरकार के पहले आम बजट से उम्मीद की जा रही थी कि दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश को प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए बेहतर कार्ययोजना होगी।
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इसकी बड़ी वजह भाजपा का विजन डाक्यूमेंट था, जिसमें प्रदूषण की समस्या के समाधान को तवज्जो दी गई थी। फिर दिल्ली समेत देश के 14 शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित 15 शहरों की लिस्ट में शामिल हैं। इसके साथ ही जल प्रदूषण बड़ी समस्या है। देश की ज्यादातर नदियां प्रदूषित हैं। विशेषज्ञ मान रहे थे कि ऐसी हालत में सरकार प्रदूषण को दूर करने की ठोस योजना बजट में लेकर आएगी।
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सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रायचौधरी बताती हैं कि बजट में क्षेत्र विशेष के लिए कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जिससे प्रदूषण में कमी लाई जा सकती है। मसलन, ई-वाहन को बढ़ावा देने की योजना है। आरआरटीएस जैसे तीव्रगामी परिवहन के साधनों पर भी काम होना है। इसके साथ उज्जवला योजना से जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल रुकेगा।
लेकिन दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण जिस स्तर तक पहुंच गया है, इससे बड़े स्तर की कार्ययोजना जरूरी है। इस लिहाज से बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा सका है।
दूसरी तरफ टेरी के अर्थ साइंस एंड क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम के डायरेक्टर सुमित शर्मा बताते हैं कि ई-वाहन को प्रोत्साहित करना सकारात्मक कदम है, लेकिन यह समझना होगा कि यह अभी शुरुआती स्तर पर है। फिर, दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में वाहन से होने वाले प्रदूषण सर्दियों में 28 फीसदी व गर्मियों में 17 फीसदी रहता है।
ई-वाहन का इस्तेमाल होने से सिर्फ पांच फीसदी की कमी आने की उम्मीद है। सरकार को पुरानी गाड़ियों को हटाने की योजना पर काम करना होगा। समस्या को एकीकृत नजरिए से देखते हुए बड़े स्तर पर प्रदूषण से निदान की कार्ययोजना बनानी जरूरी है।