मासूमों को मुस्कान देने वालों की हंसी कोरोना ने कर दी गायब
प्रधानमंत्री ने खिलौना उद्योग को बढ़ाने की बात यू ही नहीं कही। दरअसल कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा अगर कुछ प्रभावित हुआ है तो वह खिलौनों से रोजगार करने वाले लोग ही है। हर गली-मुहल्ले, धार्मिक स्थल, सार्वजनिक स्थल के सामने और घूम-घूम कर खिलौनों की बिक्री करने वालों का रोजगार ही चौपट हो गया है।
हम बात कर रहे छोटे खिलौनों की जो बड़े शहरों से लेकर गांव में भी बिकते है। ये विक्रेता आम तौर पर मंदिर, मसजिद, गुरुद्वारा, चर्च के समीप इस आस में खड़े रहते है ताकि दर्शन करने के बाद लोग अपने बच्चों की जिद पर खिलौना खरीदेगें। इसी तरह दिल्ली की बात करें तो जगह-जगह जागरण के आयोजन का चलन है। रात में शुरू होने वाले जागरण स्थल पर भी ये खिलौना बिक्रेता पहुंच जाते है।
इसी तरह जहां भी मेला या बाजार लगता है ये जरूर दिखते है। लेकिन लॉकडान में धार्मिक परिसर बंद होने से इनका रोजगार खत्म हो गया है। इसी तरह ग्रामीण इलाके मेला भी लॉकडाउन में नहीं लग रहा है कि वह अपनी रोजी-रोटी चला सके।
खिलौना व्यापारियों की माने तो छोटे खिलौनों का बहुत बड़ा मार्केट है। कुटिर उद्योग के रूप में विकसित है। दिल्ली की कॉलोनियों में बनाई जाती है। दिल्ली में बने ये खिलौने पूरे भारत में जाती है। लेकिन लॉकडाउन में यह उद्योग भी ठप पड़ा है।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल दिल्ली ईकाई के महासचिव हेमंत गुप्ता ने बताया कि कोरोना की मार तो सभी झेल रहे है, लेकिन खिलौना बेचकर रोजगार चलाने वाले सबसे ज्यादा पीड़ित हुए, क्योंकि वह घूम-घूमकर खिलौना वहीं बेचते है जहां लोगों का जमावड़ा होता है।
सार्वजनिक स्थल के बंद होने से उन्हें बेहद परेशान होना पड़ा। उधर, चीन से व्यापारिक गतिविधिया कम होने के कारण भी यह उद्योग पोस्ट लॉकडाउन में भी प्रभावित होगा। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकल के लिए वोकल होने के साथ कहा कि आईए खिलौना बनाते है।
- दिल्ली के बवाना, आजाद मार्केट, सीलमपुर, मौजपुर, गोकुलपुरी, इंद्रलोक, बादली, पुरानी दिल्ली में ये खिलौने बनाए जाते है।
- दिल्ली में प्रतिदिन 20 करोड़ के करीब व्यापार होता है।
- 10 लाख के करीब इस रोजगार से लोग जुड़े हुए है।
- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, बिहार समेत अन्य राज्यों में भी दिल्ली से व्यापार होता है।
लोकल खिलौने को बढ़ावा देगी भाजपा
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत पर जोर देंगे। प्रधानमंत्री की ‘‘मन की बात‘‘ कार्यक्रम से प्रेरणा लेते हुए भाजपा कार्यकर्ता लोकल खिलौने को बढ़ावा देंगे व आत्मनिर्भर भारत पर जोर देने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।
गुप्ता ने कहा कि जब किसी विषय पर प्रधानमंत्री मन की बात कार्यक्रम में चर्चा करते है तो ऐसा लगता है कि वो विषय हमेशा दिल की गहराइयों को छूता है। धार्मिक पूजा-पाठ, पर्व और पर्यावरण, देश के अन्नदाता किसान, भारतीयों के इनोवेशन और सलूशन देने की क्षमता, खानपान में विविधता, पोषण माह, शिक्षा में तकनीक का उपयोग, शिक्षक दिवस, भारतीय नस्ल के कुत्ते, लोकल खिलौने, वर्चुअल गेम्स, ये तमाम ऐसे विषय हैं जिसके बारे में हम लोग भी चर्चा करना चाहते हैं।
पहले बच्चे खेल-खेल में खिलौने बनाया करते थे जिससे व्यायाम भी होता था, लेकिन आजकल ऐसे खिलौने आ गए हैं जिसके कारण बच्चों का व्यायाम कम हो गया है। वर्चुअल गेम्स की थीम भी अधिकतर बाहर की होती है। अब समय आ गया है कि हम अपने देसी खिलौनों को प्रमोट करें और युवा भी भारत में वर्चुअल गेम्स तैयार करें।
दिल्ली सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार सिर्फ ईमानदारी की कसमें खाने वाली है। इनदिनों चंदा इकट्इा कर काले धन को सफेद बनाने के गोरखधंधे में लिप्त है। प्रदेश भाजपा कार्यालय समेत दिल्ली के कई जगहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने आम लोगों के साथ मन की बात सुनी।