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हरियाणा में पहला कचरे से बिजली बनाने का प्लांट लगाने की योजना उलझी
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 13 Aug 2016 09:52 AM IST
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गुडग़ांव और फरीदाबाद को स्मार्ट बनाने की योजना को जोर का झटका लगा है। हरियाणा सरकार और नीलकंड समूह के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (एमओयू ) पर हस्ताक्षर के छह महीने बाद भी वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया है। दरअसल, एमओयू साइन होने के बाद स्थानीय निकास विभाग ने टेंडर आमंत्रित कर राज्य के दो बड़े शहरों की इस महत्वाकांक्षी योजना में पेंच फंसा दिया है।
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हरियाणा के पहले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का रास्ता साफ करते हुए सरकार ने इस साल फरवरी में प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी नीलकंठ समूह के साथ समझौता किया था। 800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में यूएसए की एक कंपनी को निवेश की रुचि दिखाई है, लेकिन सरकारी तंत्र की लेटलतीफी के चलते राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के प्रयास आगे बढ़ते नहीं दिख रहे हैं।
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दो साल में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन समझौता पत्र पर हस्ताक्षर से आगे कोई बात नहीं बढ़ी है। सूत्रों के मुताबिक जब एमओयू हो गया तो फिर टेंडर प्रक्रिया से इस प्रोजेक्ट को दूर रखा जाना चाहिए था। बृहस्पतिवार को फरीदाबाद में आयोजित हुए समाधान दिवस के मौके पर नीलकंड समूह की तरफ से इस मामले को जोरशोर से उठाया गया था।
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बता दें कि, स्मार्ट सिटी में दावेदारी के लिए इस प्रोजेक्ट की बड़ी भूमिका रही है। कचरा प्रबंधन में फेल फरीदाबाद को पहले चरण में स्मार्ट सिटी के तहत टॉप 20 शहरों की दौड़ से बाहर होना पड़ा है। कचरा प्रबंधन की समस्या साइबर सिटी गुडग़ांव की साख पर भी बट्टा लगा रही है। वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट के तहत 1000 टन कचरे से 50 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
दोनों शहरों को आधी-आधी बिजली
प्रोजेक्ट के तहत 50 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। गुडग़ांव व फरीदाबाद में 35-35 एकड़ जमीन मुहैया कराने की मांग कंपनी की तरफ से की गई है, ताकि गुडग़ांव और फरीदाबाद से निकलने वाला करीब 500-500 टन कचरा अलग प्लांटों में ठिकाने लगाया जा सके। कचरा निस्तारण से उत्पादित बिजली को ग्रिड के जरिए दोनों शहरों में सप्लाई दी जाएगी। प्रोजेक्ट का खर्च भी दोनों शहरों के बीच आधा-आधा बांटने का सुझाव दिया गया है।
अमेरीकी तकनीकी का इस्तेमाल
कचरे से बिजली बनाने के लिए अमेरीकी तकनीकी (प्लाजमा मैसिफिकेशन) का इस्तेमाल किया जाएगा। योजना के मुताबिक कचरे की छंटनी का काम कंप्यूराइज्ड मैकेनिज्म से होगा, यानि मानव शक्ति की बजाय कंप्यूटर से कचरे को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। कचरा निस्तारण प्रक्रिया में सभी प्रकार के कचरे का प्रयोग किया जाएगा। भले वह प्लास्टिक हो या रबड़, शीशा हो या लैदर, मैटल या पेपर या पॉलीथीन। योजना के तहत घरों से कचरा एकत्रित किया जाएगा।
फरीदाबाद और गुडग़ांव के लिए जरूरी वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट की स्टेटस रिपोर्ट देखी जाएगी। प्रोजेक्ट में जो भी अड़चनें हैं उन्हें जल्द दूर किया जाएगा।-विपुल गोयल, उद्योग मंत्री हरियाणा
वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट के तहत देश में पहली बार एक नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से गुडग़ांव-फरीदाबाद की कचरा निस्तारण की समस्या खत्म हो जाएगी।-जेपी मल्होत्रा, पैटर्न-नीलकंठ समूह
-1000 टन कचरा रोजाना निकलता है गुड़गांव-फरीदाबाद से।
-25-25 मेगावाट बिजली दोनों शहरों को मिलेगी प्लांट से।
-800 करोड़ रुपये आंकी जा रही है प्रोजेक्ट की कुल लागत।