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E Rickshaw: लॉक करने वाले एप से ही अब बैटरी अनलॉक कर रहे हैं ई-रिक्शा चालक, सरकार सख्त; सिरफिरे फिर भी सक्रिय
Sat, 04 Jul 2026 03:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा
फिरदौस आलम, नई दिल्ली
फिरदौस आलम, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 04 Jul 2026 03:51 AM IST
सार
उधर, केंद्र सरकार ने इस तरह के एप पर पाबंदी तो लगा दी है, इसके बावजूद शुक्रवार को हजरत निजामुद्दीन, सराय काले खां, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर और गीता कॉलोनी समेत अन्य इलाकों में कुछ बुजुर्ग चालक परेशान दिखे। इस एप से अनभिज्ञ कुछ चालक शरारती तत्वों के शिकार हो रहे हैं।
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विस्तार
दिल्ली की सड़कों पर पहले अदृश्य सिरफिरे जिस बीएटी-बीएमएस एप से सरेराह ई-रिक्शा की बैटरी लॉक कर रहे थे, अब उसी एप को सीखकर ई-रिक्शा चालक खुद ही अपने वाहन को अनलॉक कर रहे हैं। कई चालकों ने अपने मोबाइल फोन में एप भी डाउनलोड किया है। इसमें चालक भी एक-दूसरे की मदद कर उन्हें वाहन अनलॉक करने की तकनीक के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
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उधर, केंद्र सरकार ने इस तरह के एप पर पाबंदी तो लगा दी है, इसके बावजूद शुक्रवार को हजरत निजामुद्दीन, सराय काले खां, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर और गीता कॉलोनी समेत अन्य इलाकों में कुछ बुजुर्ग चालक परेशान दिखे। इस एप से अनभिज्ञ कुछ चालक शरारती तत्वों के शिकार हो रहे हैं।
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सिरफिरों की शरारत से मारी जाती थी दिहाड़ी
दरअसल, ई-रिक्शा की डिजिटल सुरक्षा के लिए बने इस सिस्टम का कुछ मनचले और शरारती तत्व गलत इस्तेमाल करने लगे। वे राह चलते गरीब चालकों की ई-रिक्शा बैटरियों को ऐप के जरिए रिमोटली लॉक कर देते। इसका सबसे बड़ा खामियाजा 500 रुपये रोजाना किराए पर ई-रिक्शा चलाने वाले गरीब चालकों को भुगतना पड़ता। शुरुआत में जानकारी न होने से चालक बेबस होकर गाड़ी को धक्का लगाते हुए मिस्त्री के पास ले जाते थे। मिस्त्री भी इस मजबूरी का फायदा उठाकर ताला खोलने के नाम पर 200 से 300 रुपये ऐंठ लेते। ऐसे में चालकों की पूरे दिन की गाढ़ी कमाई बर्बाद हो जाती थी और घर का किराया और चूल्हा चलाना तक मुश्किल हो जाता था।
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मुसीबत बनने वाला ऐप ही अब बना मददगार
भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद अब चालकों ने इस तकनीकी खेल को समझ लिया है। चालकों के बीच अब बीएटी-बीएमएस ऐप को लेकर जागरूकता काफी बढ़ चुकी है। शुक्रवार को भी जब कुछ मनचलों ने गाड़ियां लॉक कीं, तो चालक पसीने से तर-बतर होकर मिस्त्रियों के पास नहीं भागे। उन्होंने तुरंत जेब से अपना स्मार्टफोन निकाला और इसी ऐप के जरिए अपनी बैटरी को खुद ही अनलॉक कर लिया।
शुरुआत में तो समझ ही नहीं आया कि ई-रिक्शा अचानक से कैसे बंद हो गई। मिस्त्री के पास लेकर गया तो उसने बताया। फिर सोशल मीडिया पर देखा।
-आकिब
गरीब लोगों को हर कोई परेशान करने में ही लगा है। दो दिन पहले कुछ बाइक सवार पास से गुजरे और कुछ ही देर बाद रिक्शा बंद हो गया। उस दिन की दिहाड़ी मारी गई।
-हैदर
रिक्शा को धक्का मारकर ले जाना पड़ा। मिस्त्री को भी पैसे देने पड़े। बाद में, साथी चालकों ने बताया कि किसी ऐप की मदद से रिक्शा की बैटरी बंद कर दी गई।
-नौशाद
जहां से गाड़ी ली थी, उसके पास गया। उसने बताया कि ऐप के जरिए बैटरी का पावर कट कर दिया गया है। अब मैं दूसरे साथियों को जागरूक कर रहा हूं।
-शाहिद