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Delhi NCR News: डीवीबी पेंशनरों का राजघाट पर प्रदर्शन, 15 दिन का अल्टीमेटम
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विद्युत बोर्ड (डीवीबी) के हजारों पूर्व कर्मचारी और पारिवारिक पेंशनरों ने सोमवार को राजघाट पावर हाउस परिसर में प्रदर्शन किया। डीवीबी पेंशनर्स एवं कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए धरना-प्रदर्शन में पेंशनरों ने सरकार और बिजली विभाग पर वर्षों से टालमटोल और उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद मोर्चा ने बिजली विभाग के सचिव (पावर) को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
पेंशनरों ने कहा कि सरकार खुद को कर्मचारी हितैषी बताती है, लेकिन डीवीबी के 22 हजार से अधिक पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को उनके वैधानिक अधिकारों के लिए भटकना पड़ रहा है। कई बुजुर्ग पेंशनरों ने कहा कि सरकारें और मंत्री बदलते रहे, लेकिन उनकी फाइलें आज भी दफ्तरों में धूल खा रही हैं।
संयुक्त मोर्चा के नेता हरिराम भारद्वाज और वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि डीवीबी के निजीकरण और निगमीकरण के बाद पेंशनरों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। वे आज भी केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीएस) पेंशन नियमों के तहत आते हैं, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार के पेंशनरों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। पेंशनरों को बीच का वर्ग बनाकर छोड़ दिया गया है।
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धरने में कैशलेस चिकित्सा सुविधा सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी। पेंशनरों ने आरोप लगाया कि गंभीर बीमारी की स्थिति में पहले अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है और बाद में रिफंड के लिए महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं। पेंशनरों ने 6वें और 7वें वेतन आयोग की अधूरी सिफारिशों का मुद्दा भी उठाया।
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नई दिल्ली। दिल्ली विद्युत बोर्ड (डीवीबी) के हजारों पूर्व कर्मचारी और पारिवारिक पेंशनरों ने सोमवार को राजघाट पावर हाउस परिसर में प्रदर्शन किया। डीवीबी पेंशनर्स एवं कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए धरना-प्रदर्शन में पेंशनरों ने सरकार और बिजली विभाग पर वर्षों से टालमटोल और उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद मोर्चा ने बिजली विभाग के सचिव (पावर) को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
पेंशनरों ने कहा कि सरकार खुद को कर्मचारी हितैषी बताती है, लेकिन डीवीबी के 22 हजार से अधिक पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को उनके वैधानिक अधिकारों के लिए भटकना पड़ रहा है। कई बुजुर्ग पेंशनरों ने कहा कि सरकारें और मंत्री बदलते रहे, लेकिन उनकी फाइलें आज भी दफ्तरों में धूल खा रही हैं।
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संयुक्त मोर्चा के नेता हरिराम भारद्वाज और वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि डीवीबी के निजीकरण और निगमीकरण के बाद पेंशनरों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। वे आज भी केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीएस) पेंशन नियमों के तहत आते हैं, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार के पेंशनरों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। पेंशनरों को बीच का वर्ग बनाकर छोड़ दिया गया है।
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धरने में कैशलेस चिकित्सा सुविधा सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी। पेंशनरों ने आरोप लगाया कि गंभीर बीमारी की स्थिति में पहले अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है और बाद में रिफंड के लिए महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं। पेंशनरों ने 6वें और 7वें वेतन आयोग की अधूरी सिफारिशों का मुद्दा भी उठाया।