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बिल्डरों का मकड़जाल: फ्लैट तो मिला नहीं, दिल के मरीज हो गए
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 20 Sep 2015 03:38 PM IST
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पांच सालों से अपने फ्लैट का पजेशन लेने में बिल्डर के चक्कर काटते-काटते घर तो मिला नहीं, हॉर्ट के मरीज और हो गए। यह व्यथा है मोदीनगर केराजेश सिंघल की।
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उन्होंने घर की आस में आठ साल पहले 2007 में गुलमाहर गार्डन में अपना फ्लैट बुक कराया था। फ्लैट बुक करते समय बिल्डर ने एग्रीमेंट में 2010 में फ्लैट देने की बात कही थी। अब तक उन्हें फ्लैट नहीं मिला है।
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राजनगर एक्सटेंशन के गुलमोहर सोसाइटी में अपने घर का सपना देख रहे 700 लोग आज तक किराए के मकान में रह रहे हैं। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2007 में लांच किया गया था।
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गुलमोहर में कुल 22 टावर बनने थे, जिनमें से अब तक महज दस टावर ही पूरे हो सके हैं। 12 टावर का अभी भी निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में सैकड़ों लोग अब तक पजेशन केलिए भटक रहे हैं।
एलआईसी से रिटायर्ड मोदीनगर के राजेश सिंघल ने भी यहां अपना फ्लैट बुक किया था। उन्होंने बताया कि समय से पजेशन न मिलने पर अब वे आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। ईएमआई और मोटा किराया भरते-भरते उनकी जमापूंजी भी खत्म हो चुकी है।
कई बार बिल्डर के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन वह हर बार नई बात कह कर टरका देता है। इस चक्कर में वे अपनी शिकायत व पजेशन दिलाने के लिए डीएम और जीडीए वीसी से भी गुहार लगा चुके हैं।
इसके बाद भी कोई लाभ नहीं मिला, अब तक भी फ्लैट पूरी तरह से कंप्लीट नहीं हुआ है। समय से पजेशन न मिलने और आर्थिक तंगी की वजह से राजेश हॉर्ट के मरीज हो चुके हैं।
फिलहाल प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। राजेश का फ्लैट किस टावर में है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। वे रिकॉर्ड देखने केबाद ही आवंटी से कोई बात कर सकेंगे। -विजय जिंदल, बिल्डर