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दिल्ली की जहरीली आबोहवा दे रही जख्म: खराब हवा दे रही सोरायसिस नाम का रोग; विशेषज्ञों की ये बातें न करें अनदेखा

Sat, 28 Oct 2023 03:07 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Sat, 28 Oct 2023 03:07 PM IST
सार

विशेषज्ञों ने बताया कि रोग के बारे में जानकारी होने के बाद भी मरीज जल्दी उपचार करवाने नहीं आते। एम्स के डीन और त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कौशल वर्मा ने कहा कि देश में करीब एक करोड़ लोगों को यह बीमारी है।

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Due to bad air in Delhi people may suffer from a disease called psoriasis
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में खराब होती हवा शरीर पर लाल चकत्ते का रोग दे सकती है। इसे सोरायसिस कहा जाता है। जिसमें त्वचा की कोशिकाएं चकत्ते और खुजली वाली, सूखी पपड़ियां बनाती है। इस रोग के होने के पीछे कई कारण हैं, जिसमें प्रदूषण भी एक बड़ा कारक है। प्रदूषण का इस रोग से सीधा संबंध है। यह आटोइम्युन की बीमारी है। यदि कोई व्यक्ति इससे पीड़ित है तो प्रदूषण समस्या को बढ़ा सकता है। इससे पीड़ित मरीज यदि समय पर उचित इलाज नहीं करवाता तो उसे हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक आने का खतरा बना रहता है।

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दरअसल विश्व सोरायसिस दिवस से पूर्व एम्स में इसे लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि रोग के बारे में जानकारी होने के बाद भी मरीज जल्दी उपचार करवाने नहीं आते। एम्स के डीन और त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. कौशल वर्मा ने कहा कि देश में करीब एक करोड़ लोगों को यह बीमारी है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। यदि समय पर इसका उपचार नहीं करवाते तो यह शरीर में फैलकर महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करती है।

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लोगों में जागरूकता का अभावएम्स के स्पेशल क्लीनिक में पिछले तीन साल में इस रोग का उपचार करवाने तीन हजार मरीज आए हैं। इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता का अभाव है। कुछ लोग मानते हैं कि इसका इलाज नहीं हो सकता है। यह धारणा पूरी तरह गलत है। इसका असरदार इलाज उपलब्ध है। कुछ मरीजों को इलाज के बाद दोबारा बीमारी हो जाती है उसका दोबारा इलाज भी हो सकता है।

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यह है कारण
- मोटापा
- शराब का सेवन
- स्मोकिंग
- खराब लाइफ स्टाइल

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इस उम्र में ज्यादा देखी जाती ये समस्या
यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 20 से 30 साल की उम्र और 50 साल से अधिक के उम्र के ग्रुप में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।

की जा रही है स्टडी
एम्स में इस रोग के उपचार को लेकर कई स्तर पर स्टडी की जा रही है। इसमें सूर्य की किरणों से जुडी एक स्टडी शामिल हैं जिसमें कृत्रिम रोशनी से उपचार किया जाता है। इसके अलावा होम बेस थेरेपी पर भी अध्ययन चल रहा है।

बढ़ता है मानसिक रोग
मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार ने कहा कि यह रोग लोगों को मानसिक बीमारी भी देता है। इस रोग के होने के बाद लोग एक दूसरे से मिलने से बचते हैं। पीड़ित दूसरों को दूरी बनाने लगता है।

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